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धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं भगवान: सुंदर राज

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कंदवा। पृथ्वी पर जब-जब असुरों का आतंक बढ़ा है और धर्म के स्थान पर अधर्म बढ़ता है तब-तब धर्म की स्थापना के लिए ईश्वर ने अवतार लेकर असुरों का संहार किया है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी पृथ्वी लोक पर अवतरित होकर धर्म की स्थापना की। यह बातें चिरईगांव में चल रहे चातुर्मास यज्ञ के दौरान मंगलवार को सुंदर राज महाराज ने कहीं। उन्होंने कहा कि आज व्यक्ति ईश्वर की सत्ता को मानने से भले ही इंकार कर दे लेकिन एक न एक दिन उसे ईश्वर की महत्ता को स्वीकार करना ही पड़ता है। संसार में जितने भी असुर हुए सभी ने ईश्वर के अस्तित्व को नकारकर स्वयं भगवान बनने का प्रयास किया लेकिन ईश्वर ने अपनी सत्ता की मात्र एक झलक दिखाकर सभी का अस्तित्व ही समाप्त कर दिया। अधर्म के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो लेकिन धर्म के मार्ग पर चलने वाले के आगे अधिक समय तक नहीं टिक सकता। जब कंस जैसे दुष्ट राजाओं के पाप से पृथ्वी बोझिल हो जाती है तो वह नारायण की शरण में जाती है। भगवान विष्णु ने सभी देवी-देवताओं को अपनी लीला में सहायक होने के लिए पृथ्वी पर जन्म लेने के लिए कहा और स्वयं भगवान देवकी के आठवीं संतान बनकर आए। भगवान श्रीकृष्ण ने बाल्यावस्था से ही कंस के भेजे असुरों का संहार कर पृथ्वी को पाप के बोझ से हल्का किया। वहीं गोवर्धन पर्वत को उंगली पर उठाकर इंद्र के घमंड को भी चकनाचूर किया। कथा श्रवण करने वालों में रेनू सिंह, मृत्युंजय सिंह, चाहत पांडेय, आकांक्षा सिंह, अशोक सिंह, वीरप्रताप सिंह, कन्हैया यादव, संतोष सिंह शामिल रहे।
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