फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय डाला छठ शुरू

विज्ञापन
विज्ञापन
पीडीडीयू नगर। लोक आस्था का महापर्व चार दिवसीय डाला छठ पर्व की शुरूआत शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ हुई। व्रतियों ने स्नान ध्यान के बाद चार दिवसीय व्रत का संकल्प लिया और शुद्धता के साथ चावल, चने की दाल, लौकी की सब्जी तैयारी की। भगवान सूर्य को जल देने के बाद इसका भोग लगाया। इसके साथ ही व्रत के विभिन्न अनुष्ठान की शुरूआत हुई।
विज्ञापन

भगवान भाष्कर की आराधना का महापर्व डाला छठ की तैयारी तो दीपावली के साथ ही शुरू हो गई थी। शुक्रवार को घरों में व्रतियों ने विशेष तैयारी कर रखी थी। सुबह पूरे घर की साफ सफाई के बाद महिलाओं ने भक्ति भाव से स्नान के ध्यान के बाद व्रत का संकल्प लिया। इसके बाद पूरी शुद्धता के साथ चावल, चने की दाल और लौकी सब्जी तैयार की। दाल और सब्जी में सेंधा नमक और सरसों तेल की जगह घी का प्रयोग किया।
जिन घरों में व्रत हो रहा है, उन घरों में दीपावली के बाद से प्याज लहसुन आदि का प्रयोग बंद कर दिया दिया गया और शुद्धता का विशेष ख्याल रखा जा रहा था। सुबह भोजन तैयार करने के बाद व्रतियों ने भगवान सूर्य की प्रार्थना करने और जलदान करने के बाद भोजन ग्रहण किया। इसके बाद पूरे परिवार के लोगों ने प्रसाद स्वरूप भोजन ग्रहण किया। इसके साथ ही घरों में अर्घ्य देने की तैयारी शुरू हो गई। व्रतियों ने अपने हाथों से भगवान भाष्कर को अर्घ्य देने के लिए पकवान तैयार करने के लिए गेहूं धोया और सूखाया। वहीं घरों में छठ व्रत के गीत शुरू हो गए।
विज्ञापन

परिवार के सदस्य घर के नजदीकी सरोवर तटों पर पहुंच कर घाट की साफ सफाई कर वहां अपना नाम लिखा और घाट छेंका। शनिवार को सुबह से व्रती निराजल व्रत करेंगे और शाम के वक्त घाटों पर दीप दान किया जाएगा। इस दौरान घाट पूजन भी होगा। इसके बाद घरों में पहुंच कर व्रती दूध, चावल और गुड़ की बखीर तैयार कर भोग लगाएंगे। इसके बाद 36 घंटे का निराजल व्रत की शुरूआत होगी।
कृष्ण और छठ पर्व का सीधा संबंध है। भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र शांब के चर्म रोग होने और सूर्योपासना से उसके ठीक होने के बाद से ही इस पर्व की शुरूआत हुई। पंडित कुंज बिहारी मिश्र के अनुसार छठ पर्व की कथा में आता है कि भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र शांब को अपने यौवन पर अहंकार हो गया था। एक दिन वह स्त्रियों के सामने ही नग्न होकर जल क्रीड़ा करने लगा। यह देख श्रीकृष्ण क्रोधित हो गए और अपने ही पुत्र को चर्म रोग होने का शाप दे दिया। बाद में उसके माफी मांगने पर श्रीकृष्ण ने शाकद्वीप से 72 ब्राह्मणों को बुलाया। ब्राह्मणों ने 12 वर्ष तक शांब से सूर्य को अर्घ्य दिलाया। इससे वह ठीक हुआ। इसके बाद यह व्रत जग में प्रचलित हुआ। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें