जिले में आम के बाग बौर से लद गए हैं। इन्हें देखकर किसान भी गदगद हैं। उन्हें अच्छे उत्पादन की आस जगी है। कृषि वैज्ञानिक भी इसे फसल के लिए शुभ संकेत मान रहे हैं। मौसम के अनुकूल होने से पेड़ बौर से लद गए हैं। फलों के राजा आम की फसल ने किसानों के चेहरों पर रौनक बिखेर दी है। आम के पेड़ों में बड़ी मात्रा में बौर और उसमें लगे फलों को देखकर किसान अंदाजा लगा रहे हैं कि फसल से मोटा मुनाफा कमाया जा सकता है। आम के पेड़ अबकी बौर से पूरी तरह ढंक गए हैं। अधिकतर बागवानों ने अपने बाग में बड़ी मात्रा में लंगड़ा, चौसा, दशहरी आदि आम का पेड़ लगाया है। आम के देसी व अन्य प्रजातियों के पेड़ भी बौर और फलों से लद गए हैं। किसान आम के पेड़ पर पर्याप्त बौर होने से काफी गदगद नजर आ रहे हैं। बागवानों का कहना है कि पेड़ों में बौर और फल लदे हुए हैं। अगर रोगों से सुरक्षित रहे तो आम का उत्पादन काफी अच्छा रहेगा। इससे काफी लाभ होने की उम्मीद है। उनकी चिंता है कि मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव के कारण आम के बौर व फल सूखकर गिरने भी लगे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि आम की फसल मौसम पर निर्भर करती है।यदि मौसम आगे भी अनुकूल रहा तो फसल अच्छी होगी। उन्होंने सलाह दी है कि बागवान आम के बौर को बचाने के लिए प्लानोफिक्स (एनएए) ढाई एमएल मात्रा 15 लीटर पानी में छिड़काव करें। इससे बौर व फल गिरना भी कम हो जाएगा और फल भी बढि़या से निकलेंगे।