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नशे का सेवन करने वाले व्यक्ति को नहीं देना चाहिए दान

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धानापुर। क्षेत्र के बुढेपुर गांव में चल रहे चातुर्मास यज्ञ में जीयर स्वामी महाराज ने भक्तों को दान की महत्ता समझाई। महाराज ने कहा कि सनातन धर्म में दान का अत्यधिक महत्व है। महाराज ने कहा कि दान देने वाले को दान लेने वाले की पात्रता की भी जांच करनी चाहिए। नशे के आदी व्यक्ति को दान देने वाला भी नरक का गामी होता है। कहा कि जो व्यक्ति खैनी, बीड़ी,गुटखा, शराब, ताड़ी, इत्यादि का सेवन करता हो। ऐसे व्यक्ति को दान देना नहीं चाहिए। ऐसा करने से दान देने वाला नरक में जाता है। वहीं दान लेने वाला व्यक्ति मरकर सुअर योनि में जन्म लेता है। महाराज ने कीर्तन की महत्ता का बखान करते हुए कहा कि कीर्तन आनंद का विषय होता है। कीर्तन में तन्मयता होनी चाहिए। कीर्तन का बहुत बड़ा महत्व होता है। शास्त्र में भगवान को पूजन करने के लिए अनेक उपाय बताया गया है। एक उपाय है भगवान के सामने नृत्य करना। कहा कि आज दुर्भाग्य है कि कुछ लोग व्यास की गद्दी पर बैठ करके व्यास गद्दी के नियम के विरूद्ध खड़े होकर नाच रहें है। यह भारत की संस्कृति के लिए दुर्भाग्य है। व्यासगद्दी की एक गरिमा होती है। मर्यादा होती है। वेद और शास्त्र के अनुसार जो ऐसा करता है ठीक नहीं है। जो आज के युग में नृत्य करते हैं वो तन्मयता के साथ नही बल्कि दिखावा करते हैं जो ठीक नहीं है। भगवान को प्रसन्न करने का दुसरा माध्यम है गीत गाकर। तीसरा वेद, पुराण का पाठ करके भगवान को प्रसन्न किया जाता है।
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