स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सभी डॉक्टर और कर्मचारी सोमवार की सुबह ओपीडी सेवाएं ठप कर धरने पर बैठ गए। सीएचसी अधीक्षक पर रिवाल्वर तानने वाले आरोपी की गिरफ्तारी न होने और गंभीर धाराओं में मुकदमा नहीं दर्ज करने पर डॉक्टर आक्रोशित थे। मौके पर पहुंचे सीओ नक्सल ने उनकी मांग पूरी करने का आश्वासन देकर धरना समाप्त कराया। सुबह से दोपहर एक बजे तक ठप रही ओपीडी बंद होने से मरीजों को बिना इलाज कराए वापस जाना पड़ा।
अपर सीएमओ डॉ. सीपी सिंह, डिप्टी सीएमओ डॉ. विजय प्रकाश, संचारी रोग के नोडल अफसर डॉ. शरद मिश्रा और सीएचसी अधीक्षक अवधेेश पटेल ने संयुक्त रूप से 9 सितंबर को नौगढ़ के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की गली में स्थित एक नर्सिंग होम पर छापा मारा था। इस दौरान पांच मरीज ऑपरेशन के पाए गए। कागजात मांगने पर अस्पताल संचालक सुजीत यादव अधिकारियों को बैठाने के बाद इधर -उधर की बात करने लगा।
अधिकारियों के अनुसार अस्पताल संचालक ने टीम से दुर्व्यवहार किया और उसके साथी सुजीत यादव ने रिवाल्वर तान दिया। दोनों अधीक्षक डॉ. अवधेश पटेल का कॉलर पकड़कर गैलरी में खींचने लगे। सीएचसी अधीक्षक की तहरीर पर नौगढ़ थाने में दोनों पर मुकदमा दर्ज हुआ। लेकिन घटना के 72 घंटे बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी न होने और तहरीर के अनुरूप गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज नहीं होने से सीएचसी के के स्वास्थ्य कर्मियों में आक्रोश है। सोमवार की सुबह ही सभी स्वास्थ्यकर्मी धरने बैठ गए।
स्वास्थ्य कर्मियों ने नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। सीएचसी अधीक्षक के मनाने पर भी नहीं माने। दोपहर एक बजे के करीब पहुंचे सीओ ऑपरेशन कृष्ण मुरारी शर्मा ने उनकी मांगें पूरी करने का आश्वासन देकर धरना समाप्त कराया। धरने में मुख्य रूप से डॉ शशि भूषण, डॉ सुनील, डॉ आशीष शुक्ला, डॉ अनीश गंगाराम भारती, दिनेश, डॉ नीरज, उमेश कुमार, स्टाफ नर्स स्नेह लता, बसंती, धर्मशिला, सुशीला आदि स्वास्थ्य कर्मी शामिल रहे।
‘दर्द, बुखार के बाद भी पैदल अइनी अस्पताल, ना भइल इलाज’
चंदौली जिला मुख्यालय से नौगढ़ की दूरी 60 किमी से भी ज्यादा है। वनांचल में एकमात्र सीएचसी महत्वपूर्ण है। यहां रोजाना ओपीडी में 200 मरीज आते हैं। रविवार को अस्पताल में अवकाश होने और फिर सोमवार को डॉक्टरों और कर्मचारियों के धरने से सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों को हुई। दर्द, उल्टी, जुकाम और बुखार से पीड़ित कई मरीजों ने सीएचसी के बाहर घंटों इंतजार किया पर इलाज नहीं हो सका। अंतत: उन्हें घर जाना पड़ा। देवखत गांव की 79 वर्षीय अतवारी देवी सुबह नौ बजे ही सीएचसी पहुंच गईं। बताया कि शरीर में दर्द रहल 12 बजे तक इंतजार कइनी पर अस्पताल बंद रहल। विनायकपुर के वृद्ध रामलखन को भी तेज बुखार था पर बताया कि घंटों इंतजार के बाद निराश होकर घर वापस जाना पड़ा। तेंदुुआ गांव के सत्यनारायण ने बताया कि पूरे शरीर में ठंड लग रहा है, दर्द और जुकाम भी है, चला नहीं जा रहा है इसके बाद भी गांव से पैदल आए थे पर डॉक्टर लोग नहीं देखे। फिर घर जाना पड़ रहा है। वहीं बाघी गांव की आठ वर्षीय जाह्नवी को उल्टी दस्त हो रहा था। घंटों इंतजार के बाद डॉक्टरों के न देेखने के बाद अभिभावक उसे किसी निजी चिकित्सालय में ले गए।