पीडीडीयू नगर। कोरोना महामारी में हजारों लोगों की मौत समय से ऑक्सीजन न मिलने से हुई। हालांकि वातावरण में ऑक्सीजन की कमी नहीं है पर वह प्रर्याप्त नहीं है। इस आपदा ने लोगों को ऑक्सीजन की अहमियत बता दी। लोग घरों में फूल और शो प्लांट के वजाय तुलसी और ऑक्सीजन देने वाले पौधे लगाने लगे हैं। पर यह भी प्रर्याप्त नहीं है। भविष्य में ऑक्सीजन का संकट न हो इसके लिए सबको अभी से वृक्षों की कटाई छोड़कर पौधरोपण करना होगा। बढ़ती जनसंख्या के कारण व आधुनिकता की अंधी दौड़ में जल, जंगल व जमीन का जमकर दोहन किया जा रहा है। वृक्षों की अंधाधुंध कटाई के फलस्वरूप कंक्रीट का जंगल बढ़ता जा रहा है। सांस लेने के लिए हवा भी जहरीली हो गई है। वृक्षों के कटने से प्रदूषण का स्तर भी बढ़ गया है। पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण एक अहम पहल है क्योंकि जीवनदायिनी ऑक्सीजन का एकमात्र स्रोत वृक्ष ही हैं। एक व्यक्ति को जीवन जीने के लिए प्रतिदिन 3:30 किलो हिसाब से अपने औसत आयु 70 वर्ष में लगभग 88200 किलो ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है। यह प्रकृति मुफ्त में दे रही है।