कंदवा। कलयुग में ईश्वर की मूर्ति का दर्शन पूजन मानव कल्याण का एक सुगम मार्ग है। जहां अधर्म बढ़ेगा वहां पाप की अधिकता बढ़ेगी और जहां पूजा पाठ और धर्म होगा वहां पुण्य होगा। ये बातें चिरईगांव में चल रहे चातुर्मास के दौरान शनिवार को सुंदरराज महाराज ने कही। कहा कि दृढ़ संकल्प के साथ ईश्वर की विग्रह का दर्शन, पूजन व भजन करने से ईश्वर सफलता का द्वार खोल देते हैं। ईश्वर के विग्रह का दर्शन पूजन कभी भी तार्किक बुद्धि, छल-कपट से नहीं करनी चाहिए। मनुष्य को ईश्वर की आराधना निर्मल मन व अंत:करण से करनी चाहिए। भगवान के चरणों में समर्पण करने से मनुष्य को जन्म मरण के आवागमन से मुक्ति मिल जाती है। सच्चे भाव से पूजा आराधना करने से भगवान प्रसन्न होकर अपने भक्तों का कल्याण करते हैं। इसलिए मनुष्य को नि:स्वार्थ भाव से ईश्वर की भक्ति करनी चाहिए। इस अवसर पर सुमंत सिंह, शिव बच्चन सिंह, आकांक्षा, सरिता, स्वाति, पूनम, कौशल्या, विंध्याचली, हिमांशु पांडेय, हरवंश सिंह रहे।