दुलहीपुर। बरसात की आस में फसलें सूख रही हैं। कृषि विभाग की माने तो जिले में सिंचाई के अभाव में करीब 60 फीसदी फसलों के उत्पादन पर असर पड़ा है, धान की नर्सरी मुरझा रही है। नहरों व माइनरों में पानी नहीं आ रहा है तो नलकूप बंद हैं। पंपिंग सेट से सिंचाई करने में मनमाना खर्च हो रहा है। जुलाई में बारिश नहीं होने से खेती पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। जिन खेतों में धान की रोपाई की गई है, उनमें दरारें पड़ गई हैं और फसल मुरझाने लगी है। पुरवा हवा चलने और बारिश नहीं होने से फसल में कीट का प्रकोप फैल रहा है। क्षेत्र के सर्वाधिक किसानों की 70 फीसदी फसल बारिश पर आधारित है। अब पानी के अभाव में इनके उत्पादन पर संकट खड़ा हो रहा है। महज 20 फीसदी फसल को अन्य साधनों से सिंचाई करने से लागत बढ़ रही है। जिसकी भरपाई संभव नहीं है। कृषि वैज्ञानिक अभयदीप गौतम ने बताया कि वहीं पिछले साल जनपद में 155.4 एमएम बारिश हुई थी तो एक लाख चौदह हजार क्षेत्रफल में धान की खेती की गई थी । वहीं एक लाख सोलह हजार दो सौ उन्यासी मिट्रिक टन कि पैदावार हुई थी। इस बार मौसम को देखते हुए यह लग रहा है कि धान की फसल प्रभावित होगी। ताराजीवनपुर प्रतिनिधि के अनुसार धानापुर रजबाहा से संबद्ध सहरोई-पटपरा माइनर में पानी नहीं होने से धान की फसल सूखने लगी है। एक किलोमीटर लंबी माइनर की मात्र सौ मीटर पर खोदाई कर ठेकेदार ने खानापूर्ति कर दी है। इससे खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा। क्षेत्र के किसान रामनिवास मिश्र, ओमप्रकाश मिश्र, सारनाथ मिश्र, हरगेन मिश्र, जगदीश चौहान, जगत चौहान, वासुदेव चौहान आदि ने आंदोलन की चेतावनी दी है। सिंचाई विभाग के एसडीओ सुधीर ओझा ने बताया कि रोस्टर के अनुसार मंगलवार से धानापुर राजवाहा में पानी छोड़ा गया है। यदि सहरोई-पटपरा माइनर में पानी नहीं पहुंचा तो मौका मुआयना कर समस्या का समाधान कराया जाएगा।