चकिया। कोतवाली क्षेत्र के सिकंदरपुर गांव के पास प्रवाहित चंद्रप्रभा नदी में बुधवार की रात शौच करने गए गांव के राहत अली उर्फ गोलू (18) का शव गुरुवार को दो बजे पुराने पुल के पास उतराया मिला। शव को एनडीआरएफ वाराणसी की टीम ने बाहर निकाला। शव के ऊपर मगरमच्छ के हमले के कोई चिन्ह नहीं पाए जाने का दावा वन विभाग कर रहा है। शव के आंख तथा कान के पास खरोच के निशान पाए गए हैं तथा नाक से खून निकला पाया गया। शव के बाहर निकालते ही परिवारीजनों ने शव को अपने कब्जे में ले लिया तथा घर चले गए। बाद में एसडीएम दीप्ति देव के समझाने-बुझाने के बाद शव पुलिस को सौंप दिया। पुलिस शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक के पिता इंशा अली ने कोतवाली में लिखित तहरीर दी है। इसमें मगरमच्छ का भी जिक्र किया गया है।
सिकंदरपुर गांव के इंशा अली का पुत्र राहत एसआरवीएस शिक्षण संस्था में कक्षा 11 का छात्र बुधवार की रात शौच के लिए चंद्रप्रभा नदी के किनारे गया था। इसी दौरान वह नदी के पानी में डूब गया। मगरमच्छ के हमले की सूचना मिलते ही चकिया रेंजर ताराशंकर यादव वनकर्मियों के साथ रात में ही मौके पर पहुंच गए। एसडीएम दीप्तिदेव, तहसीलदार शैलेन्द्र कुमार, कोतवाल अश्वनी चतुर्वेदी भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने नदी में चंद्रप्रभा बांध से छोड़े जा रहे पानी को बंद कराया गया। सूचना पर एनडीआरएफ पहुंची और नहीं में राहत की तलाश शुरू कर दी कोई सफलता नहीं मिल। गुरुवार की सुबह फिर तलाश शुरू हुई। दोपहर बाद शव पुराने पुल के नीचे से उतराया मिला। जिसे एनडीआरएफ की टीम ने बाहर निकाला। शव को बाहर निकालते ही परिवारीजनों ने शव को अपने कब्जे में ले लिया तथा घर लेकर चले गए। बाद में उपजिलाधिकारी दीप्तिदेव यादव के समझाने-बुझाने के बाद शव को पुलिस को सौंप गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। चकिया रेंजर ताराशंकर यादव ने कहा कि शव के ऊपर मगरमच्छ के हमले का कोई चिह्न नहीं पाए गए हैं। राहत के पिता इंशा अली ने चकिया कोतवाली में दिये अपनी तहरीर में परिजनों द्वारा मगरमच्छ देखे जाने की बात लिखी है।