चकिया। कोरोना संक्रमण के कारण लाकडाउन के चलते 82 दिनों तक बंद रहे राजदरी-देवदरी पर्यटन केंद्रो को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। बावजूद इसके सैलानियों की आमद नही हो रही है। इससे पर्यटन केन्द्र सूने पड़े हुए है । 82 दिनो तक बंद रहने के बाद 15 जून को राजदरी पर्यटन केन्द्र को पर्यटको के लिए पुन: खोला दिया गया। लेकिन कोराना वायरस के खौफ का साया ऐसा है कि पर्यटन केंद्रों पर पयर्टक नजर ही नहीं आ रहे है। पर्यटन केंद्र खुलने के चार दिन बाद भी वहां सैलानियों की आमद न के बराबर दिखाई दे रही है। रिमझिम फुहार के बाद भी पर्यटन स्थल सूने पड़े हुए है। राजदरी-देवदरी पर्यटन स्थल पर सैलानियों की आमद कम होने का सीधा प्रभाव पर्वतीय वन क्षेत्रों में स्थित अन्य पर्यटन स्थलों पर भी दिखाई दे रहा है। लतीफशाह, औरवाटाड़ सहित विशालकाय बांधों के जलाशयों का आनन्द लेने के लिए भी सैलानी नही आ रहे है। सैलानियों की आमद कम होने के कारण वन विभाग पूरी तरह मायूस दिखाई दे रहा है तथा राजदरी पर्यटन केन्द्र की आमदनी भी नहीं हो पा रही है। राजदरी पर्यटन केंद्र पर सैलानियों को कोरोना वायरस से बचाने के लिए सेनेटाईजर रखा गया है तथा पर्यटन केन्द्र को सेनेटाईज भी किया जा चुका है। वहीं सैलानियों को सोशल डिस्टेंसिंग अपनाने तथा मास्क लगाने का प्रचार किया जा रहा है। उसके बावजूद सैलानियों की भारी कमी देखी जा रही है। पर्यावरणविद परशुराम सिंह ने कहा कि रिमझिम फुहारों के साथ ही सैलानियों की आमद पर्वतीय वन क्षेत्र में बढ़ जाती है। लेकिन कोरोना वायरस के खौफ का साफ असर इस बार दिखाई दे रहा है। उन्होंने पर्यटको से कोरोना वायरस से बचाव के लिए विशेषज्ञों द्वारा सुझाये गये उपायों का पालन करने की अपील की।