धानापुर। क्षेत्र के बूढ़ेपुर गांव में चल रहे चतुर्मास यज्ञ में बृहस्पतिवार को जीयर स्वामी ने कहा कि दुनिया में कुछ ऐसे साधन हैं जिनसे मानव जीवन सकुशल व मर्यादित ढंग से जिया जा सकता है। साथ ही अपना आत्मा का कल्याण व मंगल भी किया जा सकता है। कहा कि शरीर को पवित्र करने के लिए सबसे पहले सुबह उठते ही श्री हरि का तीन बार उच्चारण करना चाहिए। इसके बाद अपनी हथेलियों का दर्शन कर भगवान के 14 भक्तों का नाम लेना चाहिए। ये भक्त प्रह्रलाद, नारद, परासर, पुंडरिक, व्यास, अंबरीष, शुकदेव, शौनक, भीष्माचार्य, दालभ्याम, रुकमांगद, अर्जुन, वशिष्ठ व विभीषण हैं। इनके नाम लेने से पुण्य की प्राप्ति होती है। सुख-शांति व आनंद मिलता है। कहा कि भगवान के पहले भक्त प्रह्रलाद हैं जो दैत्य वंश के पुत्र है लेकिन उनका व्यक्तित्व व उनकी नैतिकता बहुत बड़ी हैं। व्यक्ति का व्यक्तित्व अगर ठीक है तो राक्षस होने के बाद भी वह देवतुल्य माना जाता है।