पीडीडीयू नगर। पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से पराली जलाने पर लगे प्रतिबंध के बाद धान के कटोरे में किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। धान की कटाई और रबी की बोवाई के पीक सीजन में दोराहे पर खड़े जिले के किसानों को अब कुछ सूझ नहीं नहीं रहा है। हालात यह है कि खेतों में धान की फसल पककर बर्बाद हो रही मगर मुकदमा दर्ज होने के भय से अभी 60 फीसदी फसल की कटाई नहीं हो पाई है। इससे न सिर्फ उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है बल्कि गेहूं, चना, मसूर, सरसो की बोवाई भी पिछड़ रही है। दोहरा नुकसान उठा रहे किसानों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं है। इधर, जिला प्रशासन पराली जलाने के मामले में एक दर्जन किसानों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज करा चुका है। ऐसे में किसान भयभीत हैं। जिले के चकिया, शहाबगंज, बबुरी, नरवन, धीना के क्षेत्रों में धान की कटाई का काम प्रभावित है। इसकी वजह पराली है और इन क्षेत्रों के किसान असमंजस में हैं। कृषि विभाग के अनुसार जिले में तकरीबन 2.07 लाख किसान हैं। इन किसानों ने इस बार 1.12 लाख हेक्टेयर में धान की खेती की थी। इतने बड़े धान के रकबे में बिना विकल्प के पराली जलाने पर रोक बड़ी मुसीबत हो गई है। इस मामले में किसानों के हित की बात करने वाले जनप्रतिनिधि भी चुप्पी साधे हुए हैं।