पीडीडीयू नगर। रेलवे में विभागीय प्रमोशन की परीक्षा का पेपर लीक होने के मामले की जांच करने आई सीबीआई बुधवार को सुबह सबूत जुटाकर लखनऊ रवाना हो गई।
लगातार छह दिन तक जांच पड़ताल के बाद बुधवार को टीम के रवाना होने से डीआरएम कार्यालय में तैनात मंडल स्तरीय अधिकारियों ने राहत की सांस ली।
सीबीआई ने रेलवे में विभागीय प्रमोशन में बड़े पैमाने पर लेनदेन होने तथा लोको पायलट से चीफ लोको इंस्पेक्टर पद के लिए होने वाली परीक्षा से पहले पेपर लीक होने के मामले का खुलासा किया। इस मामले में बीते चार मार्च को वरीय मंडल विद्युत अभियंता परिचालन सुशांत परासर, वरीय मंडल कार्मिक अधिकारी सुरजीत सिंह के साथ लोको पायलट, कार्यालय अधीक्षक समेत 26 लोगों को गिरफ्तार कर सीबीआई लखनऊ ले गई थी। इस मामले की चर्चा चल ही रही थी कि सात मार्च को सीबीआई की आठ सदस्यीय टीम फिर जांच के लिए धमक पड़ी। टीम डीआरएम कार्यालय के बगल में स्थित गेस्ट हाउस में रुकी। इसके बाद रेल प्रशासन से सबूत एकत्र करने के लिए अस्थायी कार्यालय की मांग की। डीआरएम कार्यालय के पहले तल पर एक कमरा मिलने के बाद सीबीआई ने इसे अस्थायी कार्यालय बनाया। यहां पेपर लीक मामले में पकड़े गए आरोपियों के कार्यालय अधीक्षकों से पूछताछ की। सीबीआई की टीम ने आरोपियों के बैंक एकाउंट, मोबाइल फोन काल डिटेल सहित अन्य दस्तावेज एकत्र किए। एक-एक बिंदु पर सबूत जुटाने के बाद बुधवार को सुबह टीम लखनऊ रवाना हो गई। बुधवार को मंडल कार्यालय खुला रहा। अधिकारी व कर्मचारी समय से कार्यालय पहुंचे, लेकिन कार्यालय में सीबीआई टीम के लौटने की सूचना पर अधिकारियों व कर्मचारियों ने राहत की सांस ली। हालांकि सीबीआई टीम के बाद लगभग एक सप्ताह तक चली जांच को लेकर चर्चा भी होती रही।