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चंदौली: बौद्ध भिक्षुओं ने गौड़िहार गांव में किया रात का प्रवास

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दक्षिण कोरिया गणराज्य के 108 बौद्ध भक्षिुओं का प्रतिनिधिमंडल अपने 43 दिवसीय बौद्ध स्थलों के पदयात्रा के तहत सारनाथ से चलकर रविवार की भोर में चंदौली की सीमा में पहुंचा। यहां से पैदल चलते हुए दल चकिया के ककोरिया (गौडिहार) में पहुंच कर रात में प्रवास किया। प्रवास स्थल पर ही बौद्धभिक्षुओं ने बुद्ध वंदन और त्रिशरण पाठ की। इसके पूर्व जगह जगह बौद्ध भिक्षुओं का भव्य स्वागत किया गया। भारत एवं दक्षिण कोरिया के 50 वर्षों के डिप्लोमेटिक संबंध एवं विश्व शांति के उद्देश्य से बौद्ध भिक्षुओं का दल 43 दिनों की यात्रा पर निकला है। शनिवार को सारनाथ से चलकर रविवार की भोर में दल चंदौली सीमा में पहुंचा। यहां प्रशासनिक अधिकारियोंने पुष्प वर्षा कर दल का स्वागत किया। वहीं यहां से पैदल चलते हुए 24 किमी की यात्रा पूरी कर सिकंदरपुर कंचन मार्ग से बौद्ध भिक्षु चकिया पहुंचे। यहां एसडीएम ज्वाला प्रसाद ने भिक्षुओं का स्वागत किया। दल के गौडिहार स्थित लान में पहुंचने के पूर्व बौद्ध भिक्षुओं ने मनरेगा उपवन में सामूहिक रूप से बुद्ध वंदना और त्रिशरण पाठ कर माहौल को बुद्धम शरणम गच्छामि के उद्घोष से गुंजायमान किया। एसडीएम ज्वाला प्रसाद ने कहा कि बौद्ध भिक्षु सोमवार की सुबह शहाबगंज विकास खंड में स्थित प्रमुख बौद्ध विहार घुरहुपुर जाएंगे। वहां से वे बिहार की सीमा में प्रवेश करेंगे। इसके पूर्व पदयात्रा मार्ग के लिए साफ-सफाई और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। बौद्ध भिक्षु पदयात्री बोधगया नालंदा राजगीर वैशाली कुशीनगर लुंबिनी और श्रावस्ती तक पदयात्रा करेंगे।
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