चकिया/ शिकारगंज। जिले का प्रथम नागरिक यानी जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर काबिज होने में धन बल की भूमिका वर्तमान राजनीतिक दौर में बढ़ गई है। जिले में पंचायत चुनाव संपन्न होने के साथ ही राजनीतिक दलों एवं जिले की राजनीति में दखल रखने वाले कद्दावरो की गतिविधियां जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर तेज हो गई है। जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर काबिज होने की होड़ में या अपने व खास को जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर बैठाने की कवायद भी शुरू हो गई है। जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर कब्जे के लिए जिला पंचायत सदस्यों की खरीद-फरोख्त तेज है। वैसे भी जिले के गठन के साथ ही अध्यक्ष पद पर हार्स ट्रेडिंग के जरिए अध्यक्ष पद काबिज होने की परंपरा रही है। जिले के गठन के साथ ही आरंभ हुई हार्स ट्रेडिंग की कवायद चुनाव दर चुनाव बढ़ती ही जा रही है। यहां तक राजनीतिक दलों के सदस्य पदों पर कब्जे का सवाल है तो जिले के गठन के बाद से ही कभी किसी एक दल का बहुमत जिला पंचायत चुनाव में नहीं रहता है। हार्स ट्रेडिंग एवं राजनैतिक साख के चलते सपा तीन बार अपना अध्यक्ष बनाने में सफल रही है। 1995 में जिले के गठन के साथ ही हुए पहले जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में निर्दल चुनाव लड़कर सुषमा पटेल ने अध्यक्ष पद पर कब्जा किया था। इस चुनाव में 50 हजार से लेकर एक लाख तक जिला पंचायत सदस्यों को दिए जाने की चर्चा थी। वर्ष 2000 में हुए चुनाव में यह आंकड़ा बढ़कर दो लाख हो गया। इस चुनाव में पूनम सोनकर जीती, जो बाद में चकिया की विधायक भी बनी। 2006 में हुए चुनाव में समाजवादी पार्टी की अमलावती यादव निर्विरोध जीती । इस चुनाव में भी जिला पंचायत सदस्यों को पैसा दिए जाने की बात सामने आई थी। वर्ष 2010 में हुए चुनाव में बहुजन समाज पार्टी समर्थित छत्रबली सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर काबिज हुए। इस चुनाव में खरीद-फरोख्त की धनराशि 20 लाख तक होने की चर्चा थी। वर्ष 2016 में हुए जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर चुनावी संघर्ष निर्दलीय विधायक सुशील सिंह की पत्नी किरन सिंह तथा सपा प्रत्याशी सरिता सिंह के बीच था। इस चुनाव में खरीद-फरोख्त की धनराशि एक करोड़ से भी ऊपर जाने की चर्चाएं आम रहीं। वर्ष 2021 में जिले का जिला पंचायत अध्यक्ष पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होने के बावजूद भी दिग्गजों की चुनाव में दिलचस्पी तथा अपने खास को जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर बैठाने की कवायद तेज हैं। दिग्गजों की ओर से इसकी कवायद भी आरंभ की जा चुकी है। लेकिन पिछड़ी सीट होने के कारण इस बार हार्स ट्रेडिंग के रेट में गिरावट आने के आसार नजर आ रही है।