पीडीडीयू नगर। मोबाइल की नीली रोशनी शुगर की परेशानी को बढ़ा रहा है। शारीरिक श्रम की कमी, जंक फूड की अधिकता और मानसिक तनाव न सिर्फ बड़ों को बल्कि बच्चों में भी मधुमेह की बीमारी बांट रहा है। इस रोग से बचाव के लिए हमें जीवन शैली में बदलाव लाने की जरूरत है। चिकित्सकों की बताया कि पश्चिमी सभ्यता का अंधानुकरण के बजाए प्रकृति के साथ कदमताल मिलाते हुए जीवन शैली अपनाने से ही इस बीमारी से बचाव हो सकता है। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. राजीव ने कहा कि मधुमेह न सिर्फ एक रोग है बल्कि रोगों की जननी है। मधुमेह का शिकार व्यक्ति अनेक बीमारियों का शिकार हो सकता है। इस रोग का सबसे बड़ा कारण आरामतलबी और अनियमित जीवन शैली है। जीवन शैली में बदलाव लाकर ही इस पर रोक लगाई जा सकती है। डॉ. शुभम सिंह ने कहा कि प्रदूषण और तनाव इस रोग का प्रमुख कारण है। बाल रोग विशेष डॉ. राजेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि पूर्व में इसे अमीरों की बीमारी कहा जाता था लेकिन आज बच्चों में भी तेजी से शुगर फैल रहा है। इसका सबसे प्रमुख कारण मोबाइल है। बच्चे आउट डोर गेम के बजाए मोबाइल पर गेम खेल रहे हैं। मोबाइल की नीली रोशनी तनाव दे रहा है। वहीं कोल्ड ड्रिंक और जंक फूड का शौक बच्चों को मोटा कर रहा है। डॉ. अमित गुप्ता ने कहा कि देर रात तक मोबाइल चलाने से नींद न आने की बीमारी हो रही है और नींद की कमी शुगर को आमंत्रित कर रहा है। वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सीएस झा ने कहा कि कोल्ड ड्रिंक, जंक फूड का अत्यधिक सेवन और आउटडोर गेम की कमी बच्चों को बीमार कर रहा है।