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विंध्याचल घाटी के पहचान रहे बावला जी : राजेश विश्वकर्मा

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चकिया। भोजपुरी कवि राम जियावनदास बावला की जयंती की पूर्व संध्या पर भीषमपुर गांव में आयोजित कवि सम्मेलन में उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। इस दौरान ‘अरे राम रे राम’ नामक पुस्तक का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। राजेश विश्वकर्मा ने भाव में प्रभाव रहे, धन के अभाव रहे, विंध्याचल घाटी के पहचान रहे बावला जी गीत प्रस्तुत कर बावला को याद किया। काव्य पाठ की शुरुआत करते हुए मनोज द्विवेदी मधुर ने डूबे सागर में मोती उठवला से हौ, केहू रोअत हो ओके हसवला से हौ, प्रीत कइला से नाहीं निभवला से हौ सुनाया। हरिवंश सिंह बवाल ने पत्थर के लकीरों से स्वर्ण अक्षरों के बीच, भूगोल है कभी-कभी इतिहास बावला प्रस्तुत किया। तेजबली अनपढ़ ने नैनवा क ज्योति लाल कहके पुकारे ली, अमृत के धार माई रस बरसावेली तथा ओमप्रकाश शर्मा ने चारों खाना चित्त हो गइल, ठोकत रहल जे ताल, कमल बंगाल में खिल गइल सुनाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। रत्नेश चंचल ने नोकरिया ए रामा जो न करावे तथा धीरेंद्र पांचाल ने जनता होईगा जो बेईमान, त प्रधान का करी सुनाकर ग्रामीण राजनीति पर कटाक्ष किया। योगेंद्र शर्मा योगी ने कभ्भो भुलाई न खुद्दी क भात नाथ सुनाकर बावला को याद किया। इस अवसर पर प्रधान प्रतिनिधि राकेश गुप्ता, मोहन शर्मा, सुरेश विश्वकर्मा, सेवानिवृत्त फौजी श्यामलाल विश्वकर्मा, शंभूनाथ शर्मा सहित अन्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्यकार बंधु पाल बंधु ने की, जबकि संचालन कैमूर-भभुआ के भारत गौरव युवा सम्मान से सम्मानित रत्नेश तिवारी चंचल ने किया।
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