कंदवा। गाय को हिंदू संस्कृति में सबसे पवित्र माना जाता है और इन्हे माता का दर्जा दिया गया है। ग्रामीण इलाकों में आज भी पहली रोटी गाय की बनाई जाती है। गाय को प्राचीन काल से ही अधिक महत्व दिया जाता है। इसे देवी- देवताओं का स्वरुप माना जाता है। शास्त्रों के मुताबिक प्रात: स्नान करके गौ स्पर्श करने से सभी पाप खत्म हो जाते हैं। वेदों में भी गाय को बहुत अधिक महत्व दिया गया है। वेदों के मुताबिक गाय में देवताओं का निवास होता है। उक्त बातें चिरईगांव में चल रहे चातुर्मास के दौरान बृहस्पतिवार को सुन्दर राज जी महाराज ने कहीं। महाराज जी ने कहा कि गौ सेवा के लिए नारायण ने भी अवतार लिया। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने नंद बाबा की नौ लाख गायों को चराया व उनकी सेवा की। जबकि आज उसी भारत में गौ माता पर अत्याचार हो रहा है। अगर भगवान गोमाता की सेवा कर सकते है तो हम इंसान इस माता की रक्षा क्यों नही कर सकते। उन्होंने कहा कि गौ माता में 33 प्रकार के देवी देवता निवास करते हैं। इनकी सेवा से हमारे पाप नष्ट होते हैं। कथा श्रवण करने वालों में सोनाली पांडेय, वैशाली सिंह, पिंकी, खुशबू, अंगद यादव, शिवाजी सिंह, हरवंश सिंह, विनोद गुप्ता मौजूद रहे।