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बाढ़ के बाद गंगा के तटवर्ती क्षेत्रों में बनी शुद्ध पेयजल की समस्या

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पीडीडीयू नगर। आर्सेनिकयुक्त पानी पीने को विवश गंगा के तटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ आने के बाद पेयजल की समस्या खड़ी हो गई है। कई गांवों में हैंडपंप आर्सेनिकयुक्त गंदा पानी दे रहे हैं। वहीं कुओं व जल के अन्य स्रोतों का पानी भी बाढ़ के पानी के साथ मिलकर गंदा हो गया है। ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जल निगम व्यवस्था में जुट गया है। पानी को शुद्ध करने के लिए विभाग की ओर से दवा मिलाई जा रही है। गंगा के तटवर्ती पड़ाव, चहनिया और धानापुर क्षेत्र के गांवों में वर्षों से दूषित पानी की समस्या बनी हुई है। इन गांवों में लगे हैंडपंपों से अक्सर आर्सेनिकयुक्त पानी आता है। जल निगम इन गांवों में बोरिंग कर पानी की टंकी व पाइपलाइन के जरिए घर-घर तक पानी पहुंचाने की मुहिम में जुटा हुआ है पर अभी पूरी सफलता नहीं मिल पाई है। गंगा व कर्मनाशा नदी में बाढ़ आने के बाद तटवर्ती गांवों के ग्रामीणों के सामने पेयजल बड़ी समस्या बनकर उभरा है। जल निगम ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का दावा कर रहा है। चहनिया क्षेत्र के जलनिगम के एई पी राम ने बताया कि टांडाकला व आसपास के क्षेत्र में हैंडपंपों से आर्सेनिकयुक्त पानी आने की शिकायत मिलती रहती है। बाढ़ के बाद हैंडपंपों का पानी अशुद्ध हो गया है। समस्या के समाधान के लिए टांडाकला में पांच सौ किलोलीटर क्षमता की पानी की टंकी लगाई गई है। इससे लोगों के घरों तक पानी पहुंचाया जा रहा है। बताया कि बाढ़ के दौरान पानी की आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा नहीं आई है। वहीं पड़ाव क्षेत्र के एई राजबली ने बताया कि बहादुरपुर स्थित नवीन पेयजल योजना के परिसर में बाढ़ का पानी घुस जाने से समस्या आई थी। टंकी में पानी चढ़ाने के लिए परिसर में लगाए गए दो ट्यूबवेलों में से एक करीब एक फीट पानी में डूब गया था। वहीं ऊंचाई पर होने के कारण दूसरा ट्यूबवेल पानी में डूबने से बचा रहा। सावधानी के लिए पानी में डूबे ट्यूबवेल को बंद कर दूसरे से पानी चढ़ाकर आपूर्ति की जा रही है। बताया कि पानी आपूर्ति के लिए लगे सभी पाइपलाइन सुरक्षित हैं। घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने व लोगों को बीमारियों से बचाने के लिए पानी में दवा भी मिलाई जा रही है।
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