कंदवा। गुरु की भक्ति मानव समाज को विकास के शिखर पर ले जा सकती है। भक्ति से मानव में आत्मबल का संचार होता है। गुरु की शरण में आने वाला कभी दुख नहीं पाता, केवल सुख की अनुभूति करता है। ये बातें स्वामी परमहंस महाराज ने बरहनी विकास खंड के मोहनभिट्टी गांव स्थित ब्रह्म विद्यालय में चल रहे दो दिवसीय प्रवचन कार्यक्रम के अंतिम दिन सोमवार को कहीं। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा दान शिक्षा व अन्न का दान है। इसलिए शिक्षा और अन्न का दान अवश्य करना चाहिए। मनुष्यों के शरीर में भगवान का वास होता है, लेकिन पाप रूपी बादल ज्ञानरूपी दिव्य दृष्टि को ढंक लेेता है। उन्होंने लोगों से काम, क्रोध, मद और लोभ का त्यागकर पीड़ित मानव की सेवा करने पर बल दिया। कहा कि गुरु नाम के जाप से समस्त पाप उसी प्रकार जलकर नष्ट हो जाते हैं जैसे अग्नि किसी वस्तु को जलाकर राख कर देती है। उन्होंने पारिवारिक रिश्तों में बढ़ती दरार पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके खात्मे के लिए महिलाओं से आगे आने का आह्वान किया। कहा कि महिलाएं समाज व परिवार का आभूषण हैं। झार के बड़े, बुजुर्गो के साथ समय व्यतीत कर बच्चे व युवा नैतिक व चारित्रिक मूल्यों को सीख सकते हैं। उन्होंने सामाजिक समरसता व भाईचारा बढ़ाने के लिए युवाओं से आगे आने का आह्वान भी किया। इस दौरान मेले का भी आयोजन किया गया था जिसमें बच्चे गुब्बारे खरीदते और पकौड़ी खाते नजर आए। इस अवसर पर अरविंद राय, श्यामसुंदर बिंद फौजी, अरुण राय, दीपू यादव, दीनानाथ उपाध्याय, रामलखन बिंद, जमुना यादव, सुशील बिंद मौजूद रहे।