स्कूली वाहनों के लिए अभिभावकों से मोटी फीस लेने के बाद भी कान्वेंट स्कूल संचालक बच्चों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरत रहे हैं। बच्चों को स्कूल लाने ले जाने के लिए कई अनफिट वाहन भी काम में लिए जा रहे हैं। इसमें कई छोटे वाहन भी हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार पंजीकृत वाहनों में अभी भी 188 स्कूली वाहनों का फिटनेस प्रमाणपत्र स्कूल प्रबंधन के पास नहीं है।
जिले में छोटे व बड़े स्कूल प्रबंधकों की ओर से बच्चों को घर से स्कूल लाने व ले जाने के नाम पर अभिभावकों से काफी मोटी रकम वसूली जाती है। इसके बाद भी स्कूल प्रबंधन की ओर से वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र लेने में कोताही बरती जा रही है। जिले के एआरटीओ कार्यालय में कुल 813 छोटे -बड़े स्कूली वाहन दर्ज हैं। इसमें बड़ी बस, मिनी बस, मैजिक समेत अन्य गाड़ियां पंजीकृत हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अभी तक विभिन्न स्कूलों के 188 वाहनों के पास फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं है। जबकि विभाग की ओर से ऐसे स्कूलों को लगातार नोटिस भेजने की कार्रवाई की जा रही है। आरआई अशोक यादव ने बताया कि अनफिट वाहनों से संबंधित स्कूल प्रबंधकों को नोटिस भेजा रहा है। वहीं डीआईओएस व अन्य अधिकारियों के माध्यम लगातार जांच कराकर प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाबत सूचित भी कराया जा रहा है।
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कागज में है विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति
पीडीडीयू नगर। स्कूली बच्चों के परिवहन के दौरान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शासन की ओर से विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति के गठन का निर्देश दिया गया था। इसमें स्कूल का प्राधिकारी अध्यक्ष होगा वहीं क्षेत्र के नायब तहसीलदार व उससे ऊपर के अधिकारी, थाना प्रभारी या चौकी प्रभारी, बीईओ, मोटरयान ऑपरेटर के दो प्रतिनिधि , दो अभिभावक सदस्य के रूप में शामिल होंगे। कमेटी समय-समय पर बैठक कर बच्चों के परिवहन के दौरान सुरक्षा को लेकर समीक्षा करेगी। लेकिन संबंधित अधिकारियों की सुस्ती के चलते सब कुछ कागजों पर चल रहा है। संवाद