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गलती होने के बाद उसे स्वीकार करना ही है मानवता

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कमालपुर। क्षेत्र के महेशी गांव स्थित हनुमान मंदिर के प्रांगण में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के छठें दिन मंगलवार को जगतगुरू आश्रम के पीठाधीश्वर व्यंकटेश आचार्य पुवराज स्वामी ने कथा का श्रवण कराते हुए कहा कि मनुष्य जीवन में भूल होना आवश्यक है। गलती कर उसे स्वीकार न करना सबसे बड़ी भूल होती है। गलती स्वीकार करना ही मानवता है। जो भूल करके दुबारा न करने का संकल्प लेता है, वही मनुष्य है। मनुष्य को आपस में सौहार्दपूर्ण जीवन व्यतीत करने व एक दूसरे के प्रति कल्याण की भावना रखना चाहिए। जीवन ज्ञान तथा वैराग्य के साथ जीने की कला सिखाता है। कथा के अंत में पूर्व विधाक मनोज कुमार सिंह डब्लू ने बह्मचारी कथा वाचक से आशीर्वाद लिया। इस दौरान वैद्य हीरामन, छोटेलाल, बबलू सिंह, सिंटू सिंह, नित्यानन्द त्रिपाठी, गुड्डू सिंह, सोनू सिंह, सत्यपाल, सुनील मौजूद रहे।
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