फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

माता-पिता ही मनुष्य के प्रथम गुरू - डॉ. विश्वेश्वरी

विज्ञापन
विज्ञापन
चकिया। श्री मानस प्रेम यज्ञ सेवा समिति की ओर से मां काली मंदिर परिसर में चल रहे संगीतमय श्रीराम कथा में विदुषी कथा वक्ता साध्वी डॉ. विश्वेश्वरी देवी ने कहा कि माता-पिता ही मनुष्य के प्रथम गुरू हैं। इनके जरिए मानव को संस्कार का ज्ञान होता है। उन्होंने पंचवटी की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान के चरणरज के स्पर्श से शिला के रूप में हजारों वर्षों से पड़ी अहिल्या का उद्धार हुआ। इस कथा के जरिए भगवान के चरण स्पर्श की स्थापना पूरे विश्व में हुई। उन्होंने कहा कि रामचरित मानस भारत के सर्वजन तथा सर्वसमाज को अच्छाई की राह पर अग्रसर करने वाला ग्रंथ है। कथा के दौरान श्यामधर शरण वैद्य, अवध बिहारी मिश्र, रामकिंकर राय, श्यामनारायण विश्वकर्मा, प्रदीप नारायण श्रीवास्तव, विजय विश्वकर्मा, राजकुमार गुप्ता, जर्नादन गुप्ता, रामचन्द्र त्रिपाठी, राजकुमार जायसवाल उपस्थित रहे। ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें