चंदौली। फीस के नाम पर अभिभावकों के मोटी रकम वसूल करने के बाद भी निजी स्कूल बच्चों के लिए खटारा वाहन धड़ल्ले से चला रहे हैं। पुलिस, परिवहन और शिक्षा विभाग निजी स्कूलों पर नकेल कसने में नाकाम साबित हो रहे हैं। स्कूल संचालकों की मनमानी नौनिहालों की सुरक्षा पर भारी पड़ सकती है। जिले में दो सौ से अधिक निजी स्कूल है, जहां बच्चों को ढोने के लिए वाहनों का प्रयोग होता है। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 51 स्कूली बसें तथा 195 मोटर कैब वाहन पंजीकृत हैं लेकिन नियम कानून को ताक पर रखकर अधिकांश स्कूल संचालकों द्वारा सवारी वाहनों और आटो से छात्रों को ढोया जाता है। आए दिन नौनिहालों के साथ हो रहे हादसों के बाद भी जिले में ओवरलोड स्कूली वाहनों पर लगाम नहीं लग पा रहा है। इसके प्रति न तो स्कूल प्रशासन गंभीर है और न ही संबंधित विभाग। पिछले दिनों चहनिया क्षेत्र में एक स्कूल बस सड़क से उतर गई और गड्ढ़े में चली गई। इसके बाद भी घटना की सबक किसी ने नहीं लिया। शिक्षा सत्र समाप्त होने के कगार पर है लेकिन स्कूली वाहनों की फिटनेस की जांच तक परिवहन विभाग ने नहीं की। अनफिट और खटारा वाहनों पर लगाम लगाने के बजाय संबंधित विभाग के अधिकारी चुप्पी साधे हैं और धड़ल्ले से ऐसे वाहनों से बच्चों को ढोया जा रहा है। अप्रैल में रेलवे ट्रैक पर स्कूल बस हादसा हुआ था। शनिवार को भदोही में वैन में आग से बच्चों के झुलसने की घटना के बाद भी परिवहन विभाग और स्कूल संचालक नहीं चेते।