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शिक्षा के बाजारीकरण के विरोध में सड़क पर उतरे लोग

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चंदौली। शिक्षा के निजीकरण और बढ़े हुए फीसों की वापसी की मांग को लेकर शनिवार को भारत की जनवादी नौजवान सभा के कार्यकर्ताओं ने मुख्यालय पर जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने कलेक्ट्रेट पर प्रदेश व केन्द्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और राज्यपाल के नाम संबोधित 15 सूत्रीय मांग पत्र प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा।इस अवसर पर गुलाब चन्द्र ने कहाकि प्रदेश व केन्द्र सरकार शिक्षा के नाम पर लोगों को गुमराह करने का काम कर रही है। शिक्षा को निजीकरण के साथ-साथ बाजारीकरण करने में सरकार अहम भूमिका निभा रही है, जो गरीब, किसान, मजदूर के लिए ठीक नहीं है। इन्टीग्रेट शिक्षा के नाम पर परिषदीय विद्यालयों को बंद करने की साजिश की जा रही है। जबकि परिषदीय विद्यालय में ही गरीब तबके के बच्चे पढ़ते हैं। उनके बंद होने से गरीबों की शिक्षा का रास्ता बंद हो जाएगा। ऐसी सरकार को हम सभी को सावधान रहने की जरूरत है। उद्योगपतियों और पूंजीपतियों को शिक्षा का निजीकरण करके केन्द्र व प्रदेश सरकार शिक्षा को व्यवसाय का दर्जा देने का काम किया है। इसका भारत की जनवादी नौजवान सभा पुरजोर विरोध करता है। कहा कि केन्द्र व प्रदेश सरकार दोनों ही गरीब, किसान व नौजवान विरोधी है। इनको मिटाने के लिए साजिश की जा रही है। अगर किसान, नौजवान व गरीब सतर्क ही हुआ तो आने वाला समय उनके लिए घातक होगा। जीएसटी लागू करके सरकार ने गरीबों को आवश्यक वस्तुओं को मनमाफिक उद्योगपतियों के दामों पर खरीदने के लिए मजबूर कर रही है। इस अवसर सुनील कुमार पटेल, सदानन्द, सीताराम, मुन्नी देवी, सुशीला देवी, राजबली, संदीप, रामसहाई आदि उपस्थित रहे। अध्यक्षता सहेन्दर व संचालन जालंधर ने किया।
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