पीडीडीयू नगर। देश में लोकसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। चुनाव की तारीखों की घोषणा का इंतजार हो रहा है। वहीं, कर्मचारियों के लिहाज से सेना के बाद सबसे बड़ी संस्था रेलवे में यूनियन की मान्यता का चुनाव होना है। रेलकर्मियों को लोकसभा चुनाव से ज्यादा यूनियन की मान्यता के चुनाव का इंतजार है। यही कारण है कि यूनियन नेताओं के हथकंडे बड़े-बड़े राजनीति दलों का भी मात दे रहे हैं। रेल कर्मचारियों की आवाज अधिकारियों और सरकार तक पहुंचाने, रेलकर्मियों को एकजुट करने के लिहाज से कर्मचारी संगठन अहम भूमिका निभाते हैं। एक के बाद एक यूनियन के गठन होने के ये वर्ष 2007 में रेलवे ने यूनियनों की मान्यता के लिए चुनाव की शुरूआत की थी। हर छह वर्ष बाद यूनियन की मान्यता का चुनाव होता है। इस वर्ष नियमानुसार अप्रैल में चुनाव होना है। पूरे देश में 17 जोन और 73 मंडल के 13 लाख से ज्यादा कर्मचारी यूनियन का चुनाव करेंगे। पूर्व मध्य रेलवे की बात करें तो यहां पांच मंडलों के 78 हजार कर्मचारी यूनियन की मान्यता के लिए वोट डालेंगे। पिछले चुनाव में ईस्ट सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन 23612 मत लेकर विजयी रही थी। ईस्ट सेंट्रल रेलवे मेंस कांग्रेस 16919 मत पाकर दूसरे, ईस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर यूनियन 9388 मत पाकर तीसरे, 5874 मत लेकर ईस्ट सेंट्रल रेलवे इंप्लाइज यूनियन चौथे और 3559 मतों के साथ पूर्व मध्य रेलवे मजदूर संघ पांचवें स्थान पर था। इस वर्ष भी इतनी ही यूनियन मैदान में दिख रही हैं। भले ही अभी चुनाव की तिथि घोषित नहीं हुई लेकिन दूसरे यूनियनों से पदाधिकारियों को अपने पाले में करने, गेट मीटिंग कर कर्मचारियों को लुभाने, एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने के साथ पोस्टर वार जोरों पर चल रहा है। छोटे-छोटे संगठनों से समर्थन हासिल करने का भी प्रयास किया जा रहा है। मुगलसराय मंडल के वरीय मंडल कार्मिक अधिकारी अजीत कुमार ने बताया कि अभी चुनाव की तिथि आई नहीं है लेकिन तैयारी जारी है। तिथि आते ही चुनाव कराया जाएगा।