पीडीडीयू नगर। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाले शौचालयों को लेकर भले ही पंचायतीराज विभाग अपनी पीठ थपथपा रहा हो, लेकिन हकीकत इसके उलट है। अधिकतर गांवों में शौचालयों का निर्माण पूरा ही नहीं हुआ है। जहां शौचालय बन भी गए हैं वहां ग्रामीण इसका उपयोग स्टोर रूम के रूप में कर रहे हैं। शौचालय में उपले, भूसा आदि रखे जा रहे हैं। दूसरी तरफ ग्रामीण शौच के लिए खेतों में जा रहे हैं। स्वस्थ भारत मिशन के तहत दो अक्तूबर तक गांवों को खुले में शौचमुक्त करना था। पंचायती राज विभाग की माने तो 2017-18 में बेस लाइन के अंदर के सभी एक लाख 29 हजार 392 लाभार्थियों के शौचालयों का निर्माण पूर्ण हो गया है। दूसरी तरफ विभागीय अधिकारियों और ग्राम प्रधानों के मनमानी के चलते कई ऐसे भी लाभार्थी है जिन्हें द्वितीय किस्त नहीं मिलने से उनके शौचालय अभी अधूरे हैं। बरहनी विकास खंड के भदखरी निवासी बनारसी राम, सदर विकास विकास खंड के जसौली गांव निवासी भवानी, शिकारगंज निवासी राणजीत मौर्य का शौचालय अधूरा पडा है। दूसरी तरफ जहां शौचालय बन गए हैं वहां भी ग्रामीण इसका उपयोग नहीं कर रहे हैं। चहनियां ब्लाक के भगवानपुर, रानेपुर महेशपुर में शौचालय में उपले रखे जा रहे हैैं। धानापुर, नियामताबाद, चकिया, सकलडीहा, नौगढ़ सहित कमोबेस सभी ब्लाकों के गांवों में इस तरह के नजारे आम हैं। जिले में कुल 734 ग्राम पंचायत और 1600 से अधिक गांव है। सभी ग्राम पंचायतों को खुले में शौचमुक्त रखने के लिए स्वच्छता ग्राही व निगरानी टीम का गठन किया गया है। इसमें ग्राम प्रधान को अध्यक्ष व 12 सदस्य शामिल है। सभी ग्राम पंचायतों में 540 स्वच्छता ग्राही नियुक्त किए गए है। बावजूद इसके यह टीम भी लोगों को ऐसा करने से नहीं रोक पा रही है। इस संबंध में जिला पंचायती राज अधिकारी उमाशंकर मिश्र ने कहा कि ग्रामीणों को खुले में शौच नहीं करने देने और शौचालयों का उपयोग करने के लिए जागरूक करने के उद्देश्य से गांवों में निगरानी समिति का गठन किया गया है।समितियां पूरी तरह से लोगों को जागरुक कर रही है। इस तरह की शिकायत मिलने पर इसकी जांच कराई जाएगी।