चंदौली। सदर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर शुक्रवार को नसबंदी के बाद महिलाओं को जमीन पर बेड लगाकर सुला दिया गया। वहीं इस दौरान महिलाओं का उपचार किए जाने की भी बात कही जा रही हैं। मामला संज्ञान में आने के बाद स्वरास्थ्य कर्मियों की नीद उड़ गई है और कार्रवाई का भी भय सताने लगा है। सरकार द्वारा सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर लोगों को सस्ती दवाओं के साथ साथ बेहतर उपचार के लिए प्रति माह मोटी धनराशि खर्च किया जा रहा हैं। लेकिन इसके परे स्वास्थ्य कर्मी और चिकित्सक पर्दे के पिछे क्या गुल खिला रहे है, यह बात शायद सरकार तक पहुंच पाए। सदर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर महिने के प्रत्येक शुक्रवार को महिलाओं की नसबंदी कराई जाती है। इसके लिए शासन स्तर से पर्याप्त बजट भी आवंटित किया जाता है। साथ ही बेड सहित दवाइयां आदि भी उपलब्ध कराई जाती हैं। लेकिन सदर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला मरीजों को जमीन पर पड़े पर लेटाकर इलाज करने का नायाब तरिका देखने को मिला। जो सरकार की योजनाओं और मंशा पर पानी फेरने के लिए काफी है। शुक्रवार को पीएचसी में 12 महिलाओं की नसबंदी कराई गई थी। वहीं आपरेशन के बाद चार महिलाओं को जमीन पर पड़े बेड पर लेटाकर ही इलाज शुरू कर दिया गया। महिलाओं के परिजनों ने इस पर विरोध जताया, तो स्वास्थ्यकर्मियों ने अस्पताल में बेड की कमी होने का हवाला देते हुए उन्हे शांत करा दिया। इसको लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिली। लोगों ने कहा कि सरकार की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाने को काफी धनराशि भेजी जा रही है। लेकिन चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मी अपनी मनामनी के चलते मरीजों के साथ अमर्यादित व्यवहार कर रहे हैं।