बुलंदशहर। गंगा किनारे स्थित धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को अब पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की तैयारी है। इसके लिए जिले में करीब 70 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का निर्माण प्रस्तावित है। यह कॉरिडोर स्याना, अनूपशहर और डिबाई तहसीलों के गंगा तटीय क्षेत्र से होकर गुजरेगा।
महाभारतकालीन पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व के धार्मिक स्थलों को आपस में जोड़ने के लिए पर्यटन विभाग ने सर्वे शुरू कर दिया है। सर्वे पूरा होने के बाद निर्माण का एस्टीमेट तैयार कर स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
जिले में गंगा किनारे कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जिनका संबंध महाभारतकाल से जुड़ा है। इन स्थलों पर हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं लेकिन सुविधाओं और विकास के अभाव में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब शासन के निर्देश और स्थानीय लोगों की मांग पर इन धार्मिक स्थलों को कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।
कॉरिडोर की कार्ययोजना को आगे बढ़ाने के लिए पर्यटन विभाग की तीन टीमें गंगा तटीय क्षेत्र में सर्वे कर रही हैं। सर्वे के दौरान धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की स्थिति और उनके विकास की संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है। कॉरिडोर बनने से बुलंदशहर के अलावा बदायूं, संभल, अलीगढ़, अमरोहा, हापुड़, मेरठ, गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर समेत आसपास के 12 जिलों के श्रद्धालुओं को लाभ मिलने की उम्मीद है।
योजना में जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को भी जोड़ने की तैयारी है। इससे दूसरे शहरों से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को गंगा तट तक पहुंचने में आसानी होगी। कॉरिडोर विकसित होने से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
सीडीओ निशा ग्रेवाल ने बताया कि गंगा तटीय धार्मिक स्थलों को कॉरिडोर के रूप में विकसित करने का कार्य पर्यटन विभाग के माध्यम से कराया जाएगा। कॉरिडोर बनने से जिले में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
जिले में धार्मिक स्थलों का हो चुका है सुंदरीकरण
जिले में विभिन्न गांवों में बने सात धार्मिक स्थानों का सुंदरीकरण कार्य पूरा हो चुका है। इसमें नगर के वलीपुरा नहर के घाट के साथ सिकंदराबाद में बूढ़ा बाबू मंदिर, सिद्ध बाबा मंदिर, अवंतिका देवी मंदिर, खुर्जा के सिद्धेश्वर बाबा मंदिर, शिकारपुर के मौनी बाबा मंदिर शामिल हैं। वहीं, गंगा किनारे अब तक 100 करोड़ रुपये सड़क चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण व 20 करोड़ रुपये धार्मिक स्थलों के सुंदरीकरण पर खर्च किए जा चुके हैं।
6.18 करोड़ से बन रहा जैव विविधता पार्क बनेगा पर्यटन की शान
नरौरा क्षेत्र के रामघाट में 6.18 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा जिले का पहला जैव विविधता पार्क पर्यटन की शान बनेगा। 40 एकड़ में विकसित हो रहे पार्क का 80 फीसदी से अधिक काम पूरा हो चुका है। पार्क में प्राकृतिक हरियाली के साथ पर्यटकों के घूमने, बैठने और प्रकृति को करीब से देखने के लिए कई सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
डीएफओ डॉ. हरेंद्र सिंह ने बताया कि पार्क में नेचर ट्रेल, प्राकृतिक ग्रीन हट, गोल हट और पक्षियों के लिए घोंसले बनाए जा रहे हैं। पर्यटकों के बैठने के लिए सुंदर हट और सीमेंट की बेंच भी तैयार की जा रही हैं। इसके अलावा पक्षी विहार, तितली पार्क, झील और अलग-अलग वाटिकाएं विकसित की जा रही हैं।
पार्क में बांस और घास से बनी झोपड़ियां भी आकर्षण का केंद्र होंगी। पार्क में बेल, बरगद, आंवला, अशोक, पीपल, खैर, गूलर, शीशम, बांस, पाकड़, अर्जुन, आम और महुआ सहित विलुप्त व दुर्लभ प्रजातियों के पौधे रोपे जा रहे हैं। यहां मौजूद 300 साल पुराना बरगद का पेड़ भी पार्क की खास पहचान बनेगा।
अहार में विकसित होगा वेटलैंड और पर्यटन स्थल
अहार क्षेत्र में वन विभाग की ओर से वेटलैंड और पर्यटन स्थल विकसित किया जाएगा। इसके लिए विभाग ने 21 एकड़ जमीन चिह्नित कर प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। डीएफओ डॉ. हरेंद्र सिंह ने बताया कि शासन से स्वीकृति मिलने के बाद परियोजना पर काम शुरू किया जाएगा।
वेटलैंड में छोटे तालाब, टापू और वॉच टावर बनाए जाएंगे। यहां जलीय जीवों और पक्षियों को देखने के साथ नौका विहार की सुविधा भी मिलेगी। पर्यटन स्थल पर पार्क, रेस्टोरेंट, पार्किंग, यात्री शेड और अन्य आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।