जिले की महिला प्रधानों को अब घर से बाहर निकल कर गांव के विकास कार्यों और शिकायतों का निस्तारण करवाने को खुद सरकारी कार्यालयाें में जाना होगा। अब सरकारी कार्यालयों में प्रधान पति और उनके पुत्रों की एंट्री बंद हो गई है। अब प्रधान पति या प्रधान पुत्र कोई सरकारी काम नहीं करा पाएंगे।
यह आदेश डीएम ने जारी किए हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी ने सभी कार्यालयों को सर्कुलर भी जारी कर दिया है। जिले में 951 ग्राम पंचायत हैं। इन पंचायतों में इतने ही प्रधान है और इनमें महिला ग्राम प्रधान भी शामिल हैं। मगर अधिकतर महिला प्रधान घर से बाहर नहीं निकलतीं।
गांव के विकास की बात हो या फिर कोई अन्य काम, सभी काम महिला प्रधानों के पति या फिर पुत्र सहित उनके परिवार के सदस्य ही करवाने के लिए सरकारी कार्यालय पहुंचते हैं। जिला पंचायत राज की बैठकों में भी महिला प्रधान मौजूद ना होकर उनके परिवार वाले ही शिरकत करते हैं। मगर अब ऐसा नहीं होगा।
अब गांव के विकास कार्यों व अन्य कार्य सभी के लिए चुनाव में चयनित हुई महिला प्रधान को ही आना होगा। डीएम ने आदेश जारी कर डीपीआरओ को इस पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। आदेश यह भी है कि यदि किसी महिला प्रधान का पति और पुत्र आदि आता है तो उसकी कोई बात नहीं सुनी जाएगी। उन्हें अवगत करवाया जाएगा कि महिला प्रधान के आने पर कार्रवाई होगी।
डीएम ने आदेश जारी किया है कि जिले में महिला प्रधान के आने पर ही काम किए जाएं। यदि उनका पति और पुत्र के अलावा परिवार का कोई सदस्य आता है तो उसकी ना तो बात सुनी जाए और ना ही काम किए जाएं। इस आदेश का पालन करने को उन्होंने सभी कार्यालयों को सर्कुलर जारी कर दिया है। - राजेश कुमार सिंह, डीपीआरओ