बुलंदशहर। कुत्ते के काटने के बाद घरेलू उपचार करने से ततारपुर निवासी एक महिला की रविवार को मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग की जांच में महिला की मृत्यु रैबीज से होने की पुष्टि हुई है। इसके लिए विभाग द्वारा मंगलवार को गांव में सर्वे किया और महिला के संपर्क में आने वालों को खोजा। इस दौरान 30 से 40 लोगों ने महिला के संपर्क में होने की बात कही है। इन सभी को अब विभाग द्वारा बुधवार को टीका लगाया जाएगा। वहीं, विभाग ने कुत्ता, बंदर आदि के काटने पर 24 से 48 घंटे में एआरवी लगवाने की अपील की है।
सदर तहसील क्षेत्र के गांव ततारपुर निवासी 35 वर्षीय महिला सीमा की रविवार को रेबीज से पीड़ित होने के कारण मौत हो गई। गांव निवासी मुकेश कुमार के अनुसार महिला को आठ महीने पूर्व एक कुत्ते ने काट लिया था। तीन दिन पूर्व उसकी हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल ले गए, जहां से रेबीज के लक्षण बताए जाने पर दिल्ली के सफरदरजंग के लिए रेफर कर दिया गया। यहां उन्हें डार्कजोन में भर्ती करने की बात कहने पर घर ले आए। घर लाने के दौरान रविवार रात को उनकी मौत हो गई। चिकित्साधिकारी डॉ. रमित कुमार ने बताया कि महिला की मौत रेबीज से हुई है। आठ महीने पूर्व महिला को कुत्ते ने काट लिया था और गरीब होने के कारण महिला द्वारा एआरवी लगवाने की जगह घर पर ही मिर्च आदि लगाकर उपचार किया गया। समय से उपचार न मिलने पर रेबीज फैल गया और महिला की मौत हो गई।
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जिले में बीते दो साल में विभाग ने तीन मौत की पुष्टि की-
जिले में बीते 2021 से अब तक विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो केवल तीन मौतों की पुष्टी रेबीज से होने की बात विभाग स्वीकार कर रहा है। इसमें एक नौ साल की सिकंदराबाद निवासी बच्ची की वर्ष 2021 में, खुर्जा निवासी एक बच्चे की वर्ष 2022 में और अब ततारपुर निवासी एक महिला की अप्रैल माह में मौत रेबीज से होने की बात विभाग के अफसर कह रहे हैं। जबकि वर्ष 2021 में खानपुर निवासी एक युवक व एक दो साल की बच्ची, वर्ष 2022 में खुर्जा निवासी एक युवक समेत आठ से अधिक लोगों की मौत रेबीज से हो चुकी है।
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- कुत्ते काटने पर ऐसे करें बचाव -
जिला अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी डॉ. पंकज उपाध्याय ने बताया कि किसी को कुत्ता, बंदर या बिल्ली ने काट लिया है तो उसे तत्काल एआरवी का टीका लगवाना चाहिए। टीका न लगवाने पर कुत्ता, बंदर या बिल्ली के रेबीज होने पर मरीज की जिंदगी पर भारी पड़ सकता हे। संबंधित में इसके लक्षण एक या दो साल नहीं बल्कि 15 साल बाद तक भी सामने आ सकते हैं। इसके लिए 24 से 48 घंटे के अंदर पहला टीका, दूसरा तीन दिन बाद, तीसरा सात दिन बाद, चौथा 14 दिन बाद और जरूरत पड़ने पर पांचवां 28 दिन बाद टीका जरूर लगवाना चाहिए। देरी करने पर उनकी जान को खतरा बन सकता हे। वहीं, इस दौरान घरेलू उपचार से बचना चाहिए।
गांव ततारपुर में मंगलवार को टीम भेजकर जांच कराई गई। साथ ही मृतका महिला के संपर्क में आने वालों को खोजा गया। सर्वे के 30 से 40 लोगों ने महिला के संपर्क में होने की बात कही है। इन सभी को बुधवार को टीम भेजकर टीका लगवाया जाएगा। लोगों से अपील है कि कुत्ता, बंदर या बिल्ली काटने पर समय से एआरवी का टीका जरूर लगवाएं। - डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ।