फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bulandshahar News: युद्ध ईरान में...दहशत-दुआ बुलंदशहर में, परिजन रख रहे पल-पल की खबर

विज्ञापन
दुबई पर ईरानी हमने हमले को लेकर  युद्ध की टीवी पर पल-पल की जानकारी लेते शिकारपुर निवासी अतुल मि
विज्ञापन
बुलंदशहर। मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) के आसमान से बरस रहीं मिसाइलों और सुलगते बारूद की तपिश ने बुलंदशहर की गलियों में बेचैनी पैदा कर दी है। ईरान और इजराइल के बीच छिड़े भीषण युद्ध ने न केवल खाड़ी देशों की शांति भंग की है, बल्कि बुलंदशहर के सैकड़ों परिवारों की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया है।
विज्ञापन

अनूपशहर, जहांगीराबाद, शिकारपुर, बुगरासी और नगर क्षेत्र के सैकड़ों युवा जो सुनहरे भविष्य के सपने लेकर दुबई, आबूधाबी, बहरीन और सऊदी अरब गए थे, वह मौत के साये में जीने को मजबूर हैं। लोग दिन रात अपनों की सलामती की दुआ कर रहे हैं।
कस्बा बुगरासी के लगभग 24 से अधिक युवा दुबई और आबूधाबी की बड़ी कंपनियों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। युद्ध की शुरुआत के साथ ही इन युवाओं के परिवारों में कोहराम मचा हुआ है। बुगरासी निवासी शानू खान के भाई फहाद खान दुबई में बतौर इंजीनियर तैनात हैं। वहीं राशिद खान के भांजे बाबर और भतीजे फहाद आबूधाबी की एक प्रमुख तेल कंपनी में कार्यरत हैं। परिजनों ने बताया कि वहां स्थिति पल-पल भयावह हो रही है। बुर्ज खलीफा जैसी गगनचुंबी इमारत के पास और एक नामी होटल के समीप मिसाइल गिरने की सूचना ने बुगरासी में हड़कंप की स्थिति है।
विज्ञापन

हैदर, हारून और अजीम जैसे युवाओं ने वीडियो कॉल पर बताया कि वे फिलहाल सुरक्षित हैं, लेकिन बाहर का मंजर डरावना है। सबसे ज्यादा दर्द उन परिवारों को है, जिनके बेटे 11 तारीख को ईद मनाने के लिए घर आने वाले थे। अप्रैल में परिवार में होने वाली शादियों की तैयारियां भी अधर में पड़ गई हैं। फ्लाइट्स रद्द होने और हवाई क्षेत्र बंद होने से वतन वापसी की उनकी उम्मीदें टूट रही हैं। अब घर में पकने वाली ईद की सेवइयां नहीं, बल्कि अपनों की सलामती की फिक्र सबसे बड़ी इबादत बन गई है।
बहरीन में मिसाइल हमलों का साया जहांगीराबाद के मासूम और कारोबारी संकट में : जहांगीराबाद के ट्रांसपोर्टर सरदार मोनी सिंह का परिवार इस समय गहरे मानसिक दबाव में है। उनका बेटा मनिंदर सिंह पिछले पांच वर्षों से सपरिवार बहरीन में है। भाई कमल ने बताया कि बहरीन की सड़कों पर अब सिर्फ सन्नाटा और दहशत है।
मिसाइल हमलों के डर से लोग राशन और दवाइयों के साथ घरों के सबसे सुरक्षित कोनों में दुबके हुए हैं। इस बीच सबसे ज्यादा चिंता 5 वर्षीय मासूम ईशानवीर की है, जो बहरीन के एक अस्पताल में भर्ती है। युद्ध की अफरा-तफरी के बीच अस्पताल में इलाज और सुरक्षा को लेकर परिजन बेहद डरे हुए हैं। इसी तरह जहांगीराबाद के मंडी कारोबारी ओमदत्त शर्मा के पुत्र गौरव शर्मा भी वहीं फंसे हैं। रसद सामग्री की कमी होने लगी है। परिवारों का कहना है कि कॉल पर जब धमाकों की आवाजें सुनाई देती हैं तो कलेजा मुंह को आ जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें