कश्मीर घाटी में विगत दो माह से बिगड़े हालातों से खुर्जा का पॉटरी उद्योग लगातार घाटे में जा रहा है। विगत दो माह से पॉटरी उत्पादों का निर्यात कश्मीर घाटी को नहीं हो पाया है। ऐसे में क्षमता से अधिक माल गोदामों में भरा पड़ा है।
एक ही स्थान पर अधिक दिनों तक पड़ा रहने से पॉटरी उत्पादों में ब्रेकेज होने का खतरा बढ़ गया है। वहीं नया माल तैयार करने के लिए काम का आर्डर न मिलने से मजदूरों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। घाटी में अशांति फैलने से पॉटरी उद्यमियों को रोज 10 से 15 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है।
कश्मीर में सिर्फ कांच से बने उत्पादों का प्रयोग होता है। इसलिए कश्मीर पॉटरी उत्पादों का बड़ा बाजार है। ऐसे में हर रोजाना यहां से 15 से 20 लाख रुपये का माल कश्मीर के लिए निर्यात होता है। पिछले दो माह से कश्मीर घाटी में फैली अशांति पॉटरी उद्यमियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी है।
ईद के बाद से उनके पॉटरी उत्पादों का निर्यात नहीं हो पा रहा है। हिजबुल कंमाडर बुरहान वानी के मरने के बाद से हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए है। इसका सीधा असर खुर्जा के पॉटरी उत्पादों पर पड़ रहा है। निर्यात नहीं होने से उद्यमियों को पॉटरी उत्पादों का क्षमता से अधिक स्टोरेज पॉटरी फैक्ट्रियों में करना पड़ रहा है। - सत्यप्रकाश दादू, पॉटरी उद्यमी
तीन माह तक एक ही स्थान पर माल पड़ा रहने से पॉटरी उत्पादों में ब्रेकेज होने के चांस बने रहते है। अगर माल में कोई कमी हो गई तो वह मार्केट में अन्य उत्पादों के सामने टिक नहीं पाएगा। इसके चलते नुकसान होने की संभावना है। वहीं, माल का क्षमता से अधिक भंडारण होने से मजदूरों को काम मिलने में दिक्कत हो रही है। - दर्शन छतवाल, पॉटरी उद्यमी