15 वर्षीय छतारी निवासी दाऊजी ने बताया कि उनके दल में कुल आठ लोग शामिल हैं। हर वर्ष वे लोग कांवड़ एवं कलश कांवड़ लेकर अपने गांव जाते थे, लेकिन इस बार उन्होंने कुछ अलग करने का निर्णय लिया। इसी सोच के तहत करीब साढ़े बारह हजार रुपये की लागत से प्लाई बोर्ड पर छह पहियों की एक विशेष गाड़ी तैयार करवाई गई है, जिसमें 5.5 किलो लोहे की किलों का प्रयोग किया गया है।
इस अनोखी कांवड़ यात्रा की खास बात यह है कि सभी कांवड़िए बारी-बारी से इस लोहे की गाड़ी पर लेटकर यात्रा कर रहे हैं। इस दौरान वे अपने शरीर को कष्ट देकर भोलेनाथ की आराधना कर रहे हैं। उनकी यात्रा लगभग 36 किलोमीटर लंबी है, जिसे वे नौ दिनों में पूर्ण करेंगे।
महाशिवरात्रि के दिन गांव पहुंचकर शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाकर अपनी यात्रा का समापन करेंगे। इस कांवड़ के साथ पांच लोग चचेरे-तहेरे भाई हैं, जबकि तीन पड़ोसी हैं। इनमें पिंटू, करण, प्रिंस, अमन, कृष्णा और मंजू सहित अन्य लोग शामिल हैं। सभी कांवड़िए एक-एक कर गाड़ी पर लेटकर यात्रा करेंगे और भोलेनाथ से मनोकामनाएं मांगेंगे।