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दो विवेचक कर रहे 13 हजार केस की जांच, अटका करोड़ों का राजस्व

Mon, 22 Feb 2021 11:08 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बुलंदशहर
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नागरिक पुलिस से विवेचनाओं का बोझ कम करने के लिए शासन स्तर से प्रदेश के सभी जनपदों में बिजली चोरी रोकने और उससे संबंधित कार्रवाई के लिए अलग से एंटी पावर थेफ्ट पुलिस थाने खोले गए। इन थामों में स्टॉफ की कमी के चलते हजारों मामलों की विवेचना ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। इस वजह से करोड़ों का राजस्व भी फंसा हुआ है। हापुड़ में सात सितंबर 2019 को हाइडिल कॉलोनी में चीफ इंजीनियर कार्यालय के पास बिजली विभाग की जमीन पर बिजली थाना (एंटी पावर थेफ्ट पुलिस थाना) खुला। जिसके बाद से बिजली चोरी के सारे मामले इसी थाने में दर्ज होने लगे। बिजली चोरी पकड़ने के लिए जेई और एसडीओ के साथ अब बिजली थाने की पुलिस भी जाती है। चेकिंग अभियान के दौरान बिजली चोरी का मामला कहीं भी पकड़ा जाए, रिपोर्ट बिजली थाने में ही दर्ज होती है। जिले में बिजली चोरी के प्रतिमाह तीन सौ से अधिक केस दर्ज हो रहे हैं लेकिन इसके बावजूद बिजली चोरी कम नहीं हो रही है। गत 15 माह पूर्व खुले बिजली थाने में अब तक 13 हजार 218 रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। हालांकि विवेचना के लिए सिर्फ दो ही विवेचक तैनात हैं। दोनों विवेचक पर विवेचनाओं का अधिक बोझ होने पर बिजली चोरी के मामले निपटने में ही नहीं आ रहे हैं।

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15 माह में दर्ज हो चुके 13 हजार 218 मामले
बिजली थाने के अफसरों के अनुसार थाना खुलने के बाद से 15 माह में अब तक बिजली चोरी के 13 हजार 218 केस दर्ज किए गए हैं। वर्तमान में 11 हजार 647 विवेचनाएं लंबित हैं, लेकिन विवेचना करने के लिए दो ही दरोगा हैं। इसके अलावा थाने में सात हेड कांस्टेबल, दो कांस्टेबल, दो ऑपरेटर और एक एसओ हैं।

एफआर लगाकर जमा कराए एक करोड़ 90 लाख रुपये
बिजली थाने में दर्ज हुए बिजली चोरी के 13 हजार 218 मामलों में से 1571 में पुलिस द्वारा फाइनल रिपोर्ट लगाई गई है। इन मामलों में आरोपियों से एक करोड़ 90 लाख से अधिक रुपये जमा करवाए गए। अफसरों के अनुसार जल्द ही गत माह में दो-तीन सौ मामलों में और फाइनल रिपोर्ट लगनी है। इससे पावर कारपोरेशन को करीब 20 से 30 लाख रुपये का और राजस्व प्राप्त होगा।
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बिजली चोरी के अब तक दर्ज हुए मामले
वर्ष दर्ज हुए एफआर लगी
2019 4,561 848
2020 7,894 723
2021 763 00
नोट : 2019 के आंकड़े नौ सितंबर से 31 दिसंबर 2019 तक हैं। जबकि, 2021 में 20 फरवरी तक के दर्ज हुए मामले हैं।

1571 केस में एफआर, सिर्फ एक में चार्जशीट
बिजली थाने में पुलिस आमतौर पर फाइनल रिपोर्ट लगाकर मामला निपटा लेती है। वजह यह है कि अगर पुलिस चार्जशीट लगाती तो बिजली विभाग को राजस्व मिलने की उम्मीद खत्म हो जाती है। लिहाजा विवेचक का प्रयास रहता है कि बिजली विभाग ने जो जुर्माना लगाया है, संबंधित द्वारा जमा करवाया जाए। जुर्माने के साथ बिजली का बकाया जमा होते ही पुलिस फाइनल रिपोर्ट लगाकर मुकदमे को खत्म कर देती है। बिजली थाने द्वारा जिले में एक मात्र खुर्जा निवासी एक पार्टी के नेता पर चार मुकदमे दर्ज होने पर चार्जशीट लगाई गई।

सभी में लगे एफआर तो मिलेगा 10 करोड़ का राजस्व
बिजली थाने में पंजीकृत 13 हजार 218 मामलों में सभी में एफआर लग जाए तो विभाग को करीब 10 से 12 करोड़ रुपये तक का राजस्व प्राप्त हो सकता है। लेकिन शुरू से ही विवेचक की कमी के चलते यह सब अभी संभव नहीं है। विभागीय अफसरों के अनुसार थाने का शुभारंभ होने के बाद से अभी तक दो विवेचक ही तैनात हैं। जबकि नियमानुसार जिले में 132 बिजलीघरों के सापेक्ष कम से कम छह से आठ विवेचक होने चाहिए।

बोले अधिकारी
थाना खुलने के बाद से अब तक 13 हजार 218 मामले दर्ज हो चुके हैं। 1571 मामलों में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई है। बिजली चोरी करने वालों से एक करोड़ 90 लाख रुपये से अधिक का राजस्व जमा कराया जा चुका है।
संजय सिंह भदौरिया, एसओ बिजली थाना

बिजली चोरी रोकने के लिए लगातार अभियान चलाया जाएगा। बिजली चोरी मिलने पर संबंधित पर रिपोर्ट दर्ज कराने के साथ जुर्माना वसूला जाएगा। जो बिजली थाने में होगा। - अवधेश कुमार सिंह, चीफ इंजीनियर

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