बुलंदशहर। शहर की तर्ज पर अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी सेप्टिक टैंकों से निकलने वाले मल-जल के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए जिले में दो फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) स्थापित किए जाएंगे। दोनों प्लांट के निर्माण पर करीब दो करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। पंचायती राज विभाग ने इसके लिए जमीन चिह्नित कर प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है। शासन से जल्द ही निर्माण की अनुमति और बजट मिलने की उम्मीद है। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत जिले की 946 ग्राम पंचायतों में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए यह पहल की जा रही है। एफएसटीपी के माध्यम से शौचालयों के सेप्टिक टैंकों से निकलने वाले मल-जल को वैज्ञानिक तरीके से शोधित किया जाएगा। इसके लिए सिकंदराबाद क्षेत्र के गांव फतेहपुर जादो और जहांगीराबाद क्षेत्र के गांव रोंडा में जमीन चिह्नित की गई है।
जिला पंचायत राज अधिकारी नवीन कुमार मिश्रा ने बताया कि विभाग की ओर से दोनों स्थानों पर जमीन चिह्नित कर आवश्यक दस्तावेज के साथ प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेज दिया गया है। जल्द ही शासन से निर्माण की अनुमति और धनराशि मिलने की उम्मीद है। इसके बाद दोनों एफएसटीपी के निर्माण का कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जिले में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत तीन लाख से अधिक शौचालयों का निर्माण कराया जा चुका है। एफएसटीपी बनने के बाद इन शौचालयों के सेप्टिक टैंकों से निकलने वाले मल-जल के सुरक्षित निस्तारण में मदद मिलेगी। इससे सेप्टिक टैंक खाली कराने और मल-जल के निस्तारण की समस्या दूर करने में सहूलियत होगी। साथ ही खुले में मल-जल डालने से होने वाली गंदगी और संक्रमण के खतरे को भी कम किया जा सकेगा।
खाद बनेगी, सिंचाई में इस्तेमाल होगा शोधित पानी
डीपीआरओ नवीन कुमार मिश्रा ने बताया कि एफएसटीपी में मल-जल का उपचार करने के बाद उससे निकलने वाले ठोस पदार्थों से खाद तैयार की जाएगी। वहीं, उपचारित पानी का इस्तेमाल निर्धारित मानकों के अनुरूप फसलों की सिंचाई में किया जा सकेगा। इससे एक ओर जहां ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होगी, वहीं दूसरी ओर अपशिष्ट पदार्थों का उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल भी संभव हो सकेगा।