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Bulandshahar News: हर कट्टे पर निकाला जाता था ढाई से तीन किलो यूरिया व डीएपी

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वह ट्रक जिससे की जा रही थी यूरिया की कालाबाजारी। फाइल फोटो।
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बुलंदशहर। यूरिया की कालाबाजारी के बाद अब पीसीएफ के अधिकारियों कर्मचारियों का जांच में एक और खेल सामने आया है। गोदामों के अंदर कट्टों से ढाई से तीन किलो डीएपी और यूरिया निकालकर दूसरे कट्टे तैयार किए जाते थे।
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इसमें यूरिया की चोरी कम और महंगी होने की वजह से डीएपी की चोरी ज्यादा की जाती थी। यूरिया के एक कट्टे की कीमत 266.50 रुपये और डीएपी के एक कट्टे की कीमत करीब 1350 रुपये है। आरोपी गोदामों के अंदर ही मशीनों से कट्टों की सिलाई कर देते थे, जिससे किसानों को कम होने की जानकारी नहीं हो पाती थी।
यूरिया की कालाबाजारी में जांच के बाद रोज चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। अब अधिकारियों की जांच में जो खेल सामने आया है, उससे पूरे सरकारी सिस्टम पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पीसीएफ के कर्मचारी और अधिकारी मिलकर गोदामों के अंदर डीएपी और यूरिया के नए कट्टे तैयार कर देते थे। डीएपी और यूरिया के एक कट्टे से ढाई से तीन किलो यूरिया और डीएपी खाद निकालते थे।
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उनको दूसरे कट्टों में भरना शुरू कर देते थे। जैसे ही एक कट्टा तैयार हो जाता था, उसे मशीन से सिलकर स्टॉक में लगा देते थे। इस बारे में भंडार गोदामों के अंदर काम करने वाले कर्मचारियों को जानकारी होती थी। इन कट्टों को अपनी सेटिंग वाली साधन सहकारी समितियों पर भेज देते थे। वहां से इन कट्टों को बेचने के बाद घोटाले में शामिल लोग एक महीने में पैसे का बंदर बांट कर लेते थे।
किसानों के कट्टों से डीएपी और यूरिया चोरी करके यह महीने में सैकड़ों नए कट्टे तैयार कर देते थे। इससे इनको मोटी आमदनी होती थी। डीएपी और यूरिया के साफ सुधरे कट्टों को यह कुछ रुपये देकर खरीद लेते थे, जिससे नए कट्टे बनाने में आसानी हो सके।
सिकंदराबाद के गांव सुखलालपुर निवासी किसान विनेश चौधरी ने बताया कि छह महीने पहले उन्होंने रोडवेज बस स्टैंड और बिलसूरी सोसायटी से यूरिया के 12 कट्टे लिए थे। सभी कट्टों की घर पहुंचकर तौल कराई गई तो सभी में दो से तीन किलो यूरिया कम था। उन्होंने सोसायटी पर दोबारा पहुंचकर तौल कराने की मांग की तो सोसायटी के पदाधिकारियों ने साफ मना कर दिया। उन्होंने भविष्य में यूरिया नहीं देने की भी धमकी दी थी। इसकी शिकायत जिला कृषि अधिकारी रामकुमार यादव से की थी। बाद में सोसायटी के पदाधिकारियों ने माफी मांगकर भविष्य में ऐसा नहीं करने का आश्वासन दिया था।
उधर, मुख्य आरोपी लेखाकार यश राघव, भंडार नायक हरेंद्र प्रताप सिंह, जिला प्रबंधक पीसीएफ दिव्यांशु वर्मा को पुलिस अभी तक गिरफ्तार नहीं कर पाई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों को पकड़ने के लिए दबिश दी जा रही है। जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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