समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की खिचड़ी पूरी तरह पक चुकी है। कभी भी इसकी औपचारिक घोषणा हो सकती है। गठबंधन की बिछी बिसात से रालोद की स्थिति अभी असमंजस में है। माना जा रहा है कि रालोद अकेले ही चुनावी मैदान में उतरेगी, जबकि सपा-कांग्रेस गठबंधन से अपने प्रत्याशी मैदान में उतारेंगी। ऐसे में जिले में तीन पर कांग्रेस और चार सपा के खाते में आती दिख रही हैं।
हालांकि पूरी स्थिति पार्टियों की ओर से घोषणा के बाद हो पाएगी। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और सपा का गठबंधन तय हो चुका है, जबकि रालोद की स्थिति असमंजस की है। बताया जा रहा है कि सपा और कांग्रेस में तो सीटों पर भी सहमति बन चुकी है, लेकिन रालोद अभी तय नहीं कर सकी है। यदि रालोद गठबंधन में शामिल नहीं होती है तो सपा-कांग्रेस चुनावी मैदान में उतर जाएंगे।
जिले की तीन सीटों पर कांग्रेस और चार सीटों पर समाजवादी पार्टी के चुनाव लड़ने की संभावना बन रही है। पार्टी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि जिले की सातों सीटों पर गठबंधन प्रत्याशी उतारने को लेकर भी सहमति बन गई है। कांग्रेस के खाते में सिकंदराबाद, खुर्जा और स्याना विधानसभा सीट आ सकती है।
स्याना और खुर्जा कांग्रेस की सिटिंग सीट हैं तो सिकंदराबाद में हुए भट्टा-पारसौल आंदोलन के चलते यह सीट कांग्रेस को मिलने की संभावना है। इस सीट पर हाल ही में बसपा छोड़कर आए एक नेता और एक किसान नेता का नाम चल रहा है। इसके अलावा सपा डिबाई, शिकारपुर, बुलंदशहर और अनूपशहर सीट पर चुनाव लड़ेगी।
डिबाई और शिकारपुर सीट सपा की सिटिंग सीट हैं। इसके अलावा अनपूशहर पर पिछली बार सपा का प्रत्याशी मामूली अंतर से चुनाव हारा था। इसको देखते हुए अनूपशहर सीट सपा अपने पास रख सकती है, जबकि बुलंदशहर सीट पर मुस्लिमों की संख्या को देखते हुए सपा ने अपने पास रखी है। माना जा रहा है कि जिले की सभी सीटों पर अब चर्तुकोणीय मुकाबला होगा।