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Accident: फौजी बनने का सपना संजोए तीनों दोस्तों की एक साथ टूटी सांसें, शादी की खुशियों में मची मातम की चीत्कार

Sat, 01 Nov 2025 11:01 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिकंदराबाद (बुलंदशहर)

सार

तीनों ही भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना चाहते थे। इसी तैयारी के लिए वे तीनों सिकंदराबाद में एक साथ कोचिंग ले रहे थे। रोहित जहां आईटीआई की पढ़ाई कर रहा था, वहीं चचेरे भाई स्वेत और मोंटू बीए की पढ़ाई कर रहे थे।
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डंपर ने तीन बाइक सवार दोस्तों को कुचला - फोटो : AI Image
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विस्तार
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जिंदगी और मौत के बीच का फासला कभी-कभी इतना मामूली हो जाता है कि पल भर में सब कुछ खत्म हो जाता है। औद्योगिक क्षेत्र के गांव शेरपुर में इस वक्त सन्नाटा पसरा है। जो परिवार रविवार को रिश्तेदारी में होने वाली शादी की तैयारी कर रहे थे, वहां अब तीन बेटों की मौत पर दिल चीर देने वाली चीत्कारें गूंज रही हैं।

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दादरी में अजायबपुर मोड पर शनिवार दोपहर हादसे में सिकंदराबाद के गांव शेरपुर निवासी तीन दोस्त रोहित, और दो चेहरे भाई स्वेत और मोंटू की जान चली गई। परिजनों ने बताया कि रविवार को नोएडा में होने वाली एक रिश्तेदारी की शादी के लिए शनिवार को शॉपिंग करने के लिए तीनों दोस्त बाइक से नोएडा जाने के लिए निकले थे लेकिन हादसे में तीनों की जिंदगी की डोर रास्ते में ही टूट गई।

बचपन की दोस्ती, एक ही स्कूल की पढ़ाई और फौज में भर्ती होकर देश सेवा का एक ही सपना संजोए इन तीन युवाओं के एक साथ दुनिया से चले जाने की खबर ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है। ग्रामीणों ने बताया कि रोहित, स्वेत और मोंटू की दोस्ती गांव में मिसाल थी। कदम से कदम मिलाकर चलने वाले ये तीनों युवा केवल दोस्त नहीं थे बल्कि उनके सपने भी साझा थे।

तीनों ही भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना चाहते थे। इसी तैयारी के लिए वे तीनों सिकंदराबाद में एक साथ कोचिंग ले रहे थे। रोहित जहां आईटीआई की पढ़ाई कर रहा था, वहीं चचेरे भाई स्वेत और मोंटू बीए की पढ़ाई कर रहे थे। रविवार को नोएडा में होने वाली शादी में शामिल होने की खुशी उनके चेहरों पर साफ झलक रही थी। शनिवार को वे इसी शादी के लिए कुछ जरूरी खरीदारी करने निकले थे। शायद उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि उनकी यह यात्रा जिंदगी की आखिरी यात्रा बन जाएगी।
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जैसे ही हादसे की खबर गांव शेरपुर पहुंची, खुशी का माहौल मातम में बदल गया। रविवार को जिन घरों में नाच-गाना और खुशियां मनाई जानी थीं, उन घरों से अब केवल रोने की आवाजें आ रही थीं। परिजन बदहवास होकर घटनास्थल की ओर दौड़े। मृतक स्वेत और मोंटू के घर तो मानो पहाड़ टूट पड़ा। वे दोनों चचेरे भाई थे और दोनों के घर में अब केवल चीत्कारें गूंज रही हैं। एक ही आंगन से दो अर्थियां उठने के दर्द से गांव वाले भी हिल गए हैं। रोहित के पिता और माता का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव का हर निवासी अपने बच्चों को गले लगाकर रो रहा है। गांव के बुजुर्गों की आंखें नम हैं। उन्होंने कहा कि हमने बचपन से इन्हें साथ खेलते देखा है। इन्हें हंसते-खेलते विदा किया था। नियति ने हमारे साथ बहुत क्रूर मजाक किया है। फौजी बनने का सपना देखने वाले अब कभी नहीं लौटेंगे।
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