औरंगाबाद के गांव जनौरा में लखावटी मध्य गंग नहर कटने से डूबी फसल। संवाद
औरंगाबाद। गांव जनौरा में सोमवार की दोपहर करीब 12 बजे लखावटी मध्य गंग नहर की पटरी कट गई। इससे किसानों की करीब पांच हजार बीघा फसल जलमग्न हो गई। सूचना पर काफी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और नहर विभाग के कर्मियों को फोन कर घटना की सूचना दी। मौके पर पहुंचे जेई का किसानों ने घेराव किया और फसल नुकसान के मुआवजे की मांग पर अड़ गए। काफी समझाने के बाद ही वह शांत हुए।
ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के करीब साढ़े तीन घंटे बाद नहर विभाग के एसडीओ विवेक शर्मा व जेई भूरा शर्मा घटना स्थल पर पहुंचे। इसके बाद किसानों ने एसडीओ और जेई को देखते ही उनका घेराव करते हुए हंगामा किया।
किसानों का कहना था कि सूचना के बाद भी नहर विभाग का कोई कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। जिस कारण किसानों को अधिक नुकसान हुआ है। यदि राहत कार्य तत्काल शुरू हो जाता तो इतना नुकसान नहीं होता। बगैर इंतजाम के पहुंचे एसडीओ और जेई के सामने ही किसानों ने खुद ही पानी को रोकने का प्रयास किया।
नतीजा विफल होने पर एसडीओ ने कर्मचारियों को लगाकर पानी के रुकवाने का प्रयास किया है।ग्रामीणों का कहना है कि नहर गांव के पास से कई बार कट चुकी है लेकिन किसानों को आज तक मुआवजा नहीं मिल सका है। नहर का कटा हुआ पानी पड़ोसी गांव पोथ तक पहुंच गया है। शाम पांच बजे औरंगाबाद पुलिस मौके पर पहुंची।
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सिस्टम की लापरवाही से तीन बार कटी नहर
किसानों के अनुसार लखावटी मध्य गंग नहर के चालू होने से पहले उसकी पटरी की मरम्मत के लिए करोड़ों का बजट आता है।नहर विभाग के अफसरों की मनमानी के कारण बजट की बंदरबाट हो जाती है और कागजों में ही मरम्मत की इतिश्री हो जाती है। यही कारण है कि नहर पटरी फिर से कट गई। जिसमें सिस्टम की लापरवाही उजागर हो रही है।
पोल्टी फार्म में घुसा पानी, लाखों के नुकसान का अनुमान
गांव जनोरा निवासी ऋषिपाल सिंह ने गांव में दो पोल्टी फार्म खोल रखे हैं। इसमें करीब बारह हजार मुर्गी के बच्चे हैं। नहर का पानी पोल्टी फार्म के अंदर तक पहुंच गया। ऋषिपाल का आरोप है कि जिसके चलते कई हजार मुर्गी के बच्चे मर गए। इससे उन्हें लाखों का नुकसान हुआ है।
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Iकरीब 15 कर्मचारियों के साथ चार जेसीबी मशीनों को पानी का कटान रोकने के लिए लगाया गया है। जिन किसानों का नुकसान हुआ है उनकी लिस्ट बनाई जा रही है। - विवेक शर्मा, एसडीओ नहरी विभाग।I