बुलंदशहर।
यूपी बोर्ड और सीबीएसई का परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद अब राजकीय और एडेड कालेजों में एडमिशन के लिए मारामारी रहेगी। इन कालेजों में सीटें कम होने के साथ फीस काफी कम है। जबकि सेल्फ फाइनेंस कालेजों में सीटें अधिक हैं, यहां गरीब परिवार के बच्चों की पढ़ाई संभव नहीं है। ऐसे में काफी संख्या में बच्चे शिक्षा से भी वंचित रह जाएंगे। इसके अलावा 12 हजार छात्र-छात्राओं को दूसरे जिलों में एडमिशन लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
जिले में तीन राजकीय, 10 एडेड और 65 सेल्फ फाइनेंस कॉलेज संचालित हैं। इनमें बीए व बीएससी प्रथम वर्ष समेत अन्य विषयों की 28 हजार सीटे हैं। यूपी बोर्ड और सीबीएसई 12वीं कक्षा का परीक्षा का परिणाम आने के बाद 40 हजार से अधिक विद्यार्थी पास हुए हैं। ऐसे में 12 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं को जिले के कॉलेजों में प्रवेश नहीं मिलेगा। इन छात्रों को या तो पढ़ाई छोड़नी पड़ेगी या फिर गैर जनपद और राज्यों में पढ़ाई के लिए जाना होगा। जबकि राजकीय और एडेड कॉलेजों में करीब आठ हजार सीट हैं। इनमें प्रवेश पाने में सफल होने वाले विद्यार्थियों को फीस कम होने पर पढ़ाई करना आसान रहेगा। जबकि 65 कॉलेजों में बीए और बीएससी समेत अनेक प्रोफेशनल कोर्स कराए जाते हैं। इन कॉलेजों में करीब 20 हजार सीटों पर प्रवेश तो मिल जाएगा, लेकिन यहां पढ़ाई करने के लिए महंगी फीस भी देनी होगी। जो तमाम छात्र-छात्राओं के अभिभावक इसे वहन करने में समक्ष भी नहीं होंगे।
ये हैं सरकारी और एडेड कॉलेज
राजकीय पीजी कॉलेज जहांगीराबाद, राजकीय पीजी कॉलेज बीबीनगर और राजकीय कन्या डिग्री कॉलेज अरनिया। एडेड कॉलेजों में डीएवी पीजी कॉलेज बुलंदशहर, आईपी कॉलेज बुलंदशहर, एनआरईसी कॉलेज खुर्जा, एकेपी कॉलेज खुर्जा, अमर सिंह पीजी कॉलेज लखावठी, डीएन पीजी कॉलेज गुलावठी, दिगंबर जैन पीजी कॉलेज डिबाई, डीपीबीएस कॉलेज अनूपशहर, एएस कॉलेज सिकंदराबाद और जेएस पीजी कॉलेज सिकंदराबाद शामिल हैं।