खुर्जा जंक्शन रेलवे स्टेशन पर खड़ी रीवा एक्सप्रेस की छत पर घूमता कुत्ता - स्रोत- वीडियो ग्रैबखु
खुर्जा जंक्शन। रीवा-आनंद विहार सुपरफास्ट ट्रेन की दो बोगियों के बीच में बैठे एक कुत्ते को पकड़ने के लिए रेलवे का अमला बृहस्पतिवार को पूरी रात परेशान रहा। ट्रेन रीवा से चलकर सतना, प्रयागराज, कानपुर सेंट्रल होते हुए अलीगढ़ तक आ गई। रात होने की वजह से बोगियों के बीच में दुबके कुत्ते को कहीं देखा नहीं जा सका। सुबह होने पर खुर्जा में कुत्ते को खोजा गया लेकिन 23 मिनट की कवायद के बाद भी उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
रीवांचल सुपरफास्ट ट्रेन मध्यप्रदेश के रीवा से चलकर दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल तक जाती है। रेलवे के अधिकारियों के अनुसार कुत्ता रीवा के यार्ड से ही ट्रेन की इंटरकनेक्टेड दो बोगियों के बीच की जगह में ऊपर बैठ गया रहा होगा। ट्रेन चली तो किसी को दिखा नहीं होगा। चलती ट्रेन में कुत्ता बोगी की छत पर पहुंचकर टहलने लगा तब लोको पायलट को संकेत मिला। तब तक रात हो चुकी थी। ट्रेन जब ठहराव वाले स्टेशनों पर रुकती तो कुत्ता दुबककर फिर बोगियों के बीच में बैठ जाता था। रात होने की वजह से कहीं वह पकड़ा नहीं जा सका।
ट्रेन के अलीगढ़ से चलने के बाद कुत्ता फिर थोड़ी देर के लिए फिर छत पर पहुंच गया। लोको पायलट को दोबारा संकेत मिलने पर सुबह करीब छह बजे आपातकालीन परिस्थितियों में ट्रेन को खुर्जा जंक्शन रेलवे स्टेशन पर रोक दिया गया। ओवरहेड इलेक्टि्रक (ओएचई) लाइन में विद्युत प्रवाह रोकने के लिए स्टेशन पर अप लाइन में ब्लॉक लिया गया। इसके बाद बोगियों के बीच में बैठे कुत्ते को खोजा गया। उतारने की कोशिश शुरू हुई तो कुत्ता ट्रेन की छत पर चढ़ गया।
इस दौरान कुत्ता ट्रेन की बोगियों की छत पर इधर-उधर दौड़ता रहा। उसे उतारने के लिए रेलवे के कर्मचारियों के साथ जीआरपी और आरपीएफ के कर्मचारी भी दौड़ते रहे। यह कवायद लगभग 23 मिनट तक चलती रही। इसी दौरान डाउन लाइन से एक ट्रेन गुजर रही थी। तभी कुत्ता ट्रेन की छत से कूद गया और दूसरी ट्रेन की चपेट में आकर मर गया। खुर्जा जंक्शन के स्टेशन अधीक्षक घनश्याम मीणा ने बताया कि इस दौरान ट्रेन स्टेशन पर रुकी रही। इसके बाद आनंद विहार के लिए रवाना की गई। (संवाद)
हादसे का था खतरा
आरपीएफ प्रभारी नंद लाल मीणा ने बताया कि यदि कुत्ता बोगियों के बीच में फंस जाता तो हादसे का खतरा था। किसी वस्तु के फंसने पर बफर जाम होने का खतर होता है। इस वजह से बोगियों के बीच में बैठे कुत्ते को उतारना जरूरी था। कुत्ते के ओएचई लाइन में टकराने या कूदने पर किसी ट्रेन के सामने गिरने से भी नुकसान का डर था।