फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bulandshahar News: फर्जी बिल भेजने वाले अधिकारियों की जेब से कटेगा हर्जाना

विज्ञापन
विज्ञापन
बुलंदशहर। ऊर्जा निगम के अधिकारियों की मनमानी के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग ने फैसला सुनाया है। उपभोक्ता को नाजायज तरीके से परेशान करने और अवैध वसूली न देने पर फर्जी भारी-भरकम बिल भेजने के मामले में आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच और उनकी सैलरी से हर्जाना वसूलने के भी आदेश दिए हैं।
विज्ञापन

तहसील बुलंदशहर के गांव गिनौरा जिन्नादार निवासी हरस्वरूप शर्मा के घर पर घरेलू विद्युत कनेक्शन लगा है। हरस्वरूप लंबे समय से अपना बिल समय पर जमा कर रहे थे, जो औसतन 600 रुपये प्रति माह आता था। विवाद तब शुरू हुआ जब 24 सितंबर 2024 को अवर अभियंता फीडर महाराजपुर ने उनके मीटर को खराब बताकर बदल दिया।
इसके ठीक बाद 30 सितंबर को अधिशासी अभियंता नगरीय परीक्षण खंड तृतीय ने उन पर सरचार्ज लगाकर 22,310 का एकमुश्त नोटिस भेज दिया। जब पीड़ित ने विभाग से संपर्क किया, तो आरोप है कि कर्मचारियों ने बिल ठीक करने के नाम पर अवैध धनराशि की मांग की।
विज्ञापन

हरस्वरूप द्वारा रिश्वत देने से मना करने पर विभाग के कर्मचारियों ने द्वेष भावना से ग्रसित होकर उन पर 49,986 का बकाया दर्शा दिया। आरोप है कि उत्पीड़न यहीं नहीं रुका, मानसिक क्षति पहुंचाने के उद्देश्य से बाद में उन्हें 52,225 रुपये का बिल थमा दिया गया।
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष/न्यायाधीश हसनैन कुरैशी एवं महिला सदस्य नीलम कुमारी की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। आयोग ने पाया कि बिजली विभाग के अधिकारियों ने जानबूझकर उपभोक्ता को परेशान किया। कोर्ट ने दोनों विवादित बिलों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह अधिकारियों की व्यक्तिगत लापरवाही और भ्रष्टाचार का मामला है। कोर्ट ने आदेश दिया कि उपभोक्ता को हुई मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए 20,000 मुआवजा दिया जाए। वाद व्यय के रूप में 10,000 रुपये का भुगतान किया जाए। यदि 30 दिन के भीतर यह राशि नहीं दी जाती, तो इस पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उपभोक्ता आयोग ने प्रबंध निदेशक, पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, मेरठ को इस प्रकरण की गहन जांच के आदेश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि इस भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान कर उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाए और जुर्माने की राशि उन दोषी अधिकारियों के वेतन से वसूल की जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें