वेव शुगर मिल प्रबंधन चीनी बेचकर गायब हो गया है। मिल के गोदाम में चीनी का स्टॉक निल हो चुका है। अफसरों का कुछ पता नहीं मिलने से किसान और अफसर बेचैन हैं।
बता दें कि वेव शुगर मिल पर गन्ना किसानों का करीब चार करोड़ रुपये अभी बकाया है। प्रबंधन के एकाएक गायब होने से गन्ना किसान भटकने को मंजूर हैं।
गत पेराई सत्र में वेव शुगर मिल में 73,730 बैग (प्रति बैग 50 किग्रा.) चीनी का उत्पादन किया गया था। चीनी प्रशासन की कस्टडी में थी।
इसके बावजूद मिल प्रबंधन ने गोदाम में चीनी का स्टॉक निल कर दिया। खास बात यह है कि चीनी बेचकर मिल ने शत प्रतिशत गन्ना का पेमेंट भी नहीं किया।
उधर, जिला गन्ना अधिकारी एपी सिंह सप्ताह में दो बार मिल में पहुंचकर मिल प्रबंधन से बात करना चाही। मगर, गन्ना अधिकारी को मिल में सिक्योरिटी गार्ड के सिवाय कोई नहीं मिला।
वेव ग्रुप की दूसरी मिलों में भी गन्ना अधिकारी ने बात की। वहां भी गन्ना अधिकारी को प्रबंधन के बारे में पुख्ता जानकारी नहीं मिली।
शीरे की कीमत 60 लाख
जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि वेव शुगर मिल में करीब 60 लाख रुपये का शीरा रखा हुआ है। शीरा बेचकर किसानों को गन्ने का पेमेंट कराया जाएगा। वेव शुगर मिल ने कर्ज लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
मिल पर नौकरशाहों की निगरानी रही कमजोर
वेव शुगर मिल के विवादों में आने के बाद भी नौकरशाहों की मिल पर निगरानी बेहद कमजोर रही, जिसका नतीजा प्रबंधन के चीनी लेकर भाग जाने के तौर पर सामने आया।
गत वर्ष जब पेराई सत्र के बीच में शुगर मिल को बंद कर दिया गया तो प्रशासन का रुख मिल को चलवाने के बजाय गन्ने को दूसरे मिलों में डायवर्ट कराना था।
यही कारण है कि एक साल में मिल प्रबंधन ने मिल में प्रदूषण नियंत्रण पर रत्ती बराबर काम नहीं किया। प्रशासनिक अफसरों की सख्ती भी सिर्फ दिखावे तक ही सीमित रही।
पेराई सत्र की शुरुआत में मिल गन्ना खरीद नहीं कर रही है। अफसर अगर शुरू से ही सतर्क होते तो मिल प्रबंधन चीनी निकालने में कामयाब नहीं होता।
चारों शुगर मिलों के अधिकारियों और डीसीओ को मीटिंग के लिए बुलाया गया है। किसानों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। वेव शुगर मिल के प्रबंधन की तलाश की जा रही है। मीटिंग में यदि मिल के प्रबंधक शामिल नहीं हुए तो कार्रवाई की जाएगी।
- बी. चंद्रकला, डीएम, बुलंदशहर