एनएच 91 के निर्माण में जमीन दे चुके किसानों को लंबी लड़ाई के बाद न्याय मिला है। उचित मुआवजे के लिए किसानों ने सैकड़ों बार धरना-प्रदर्शन किया था। काम रुकवाने पर कई बार प्रशासन के साथ बैठक हुई थी। किसानों ने विभाग के अफसरों पर भूमि अधिग्रहण करते समय कई वादे करने की बात कहते हुए अपने हक की लड़ाई जारी रखी।
वर्ष 2009 में राष्ट्रीय राजमार्ग 91 का काम शुरू हुआ। खुर्जा सिटी के बाहर से राष्ट्रीय राजमार्ग को अलीगढ़ होते हुए कानपुर ले जाया गया। खुर्जा बाईपास पर गांव वाजिदपुर और गांव झमका के किसानों की जमीन का अधिग्रहण हुआ।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने 784 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से भूमि का अधिग्रहण किया। लेकिन किसानों ने वर्तमान सर्कल रेट से चार गुना रेट पर जमीन अधिग्रहण करने की मांग की।
किसानों ने बताया कि कुछ लोगों की पूरी जमीन राष्ट्रीय राजमार्ग में चली गई थी। ऐसे में किसानों ने परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और उचित मुआवजा दिलाने की मांग की थी। मांग पूरी न होने पर किसानों ने धरना-प्रदर्शन किया था। प्रशासनिक अफसरों ने किसानों से बातचीत के जरिए समस्या का समाधान करने का प्रयास किया था।
किसानों ने प्रशासन के यहां उचित मुआवजे की मांग करते हुए अपील की थी। वर्ष 2016 में प्रशासन ने सभी अपीलों पर सुनवाई करते हुए करीब 400 किसानों को नौ करोड़ रुपये देने का आदेश दिया था। उस आदेश के तहत किसानों को कृषि भूमि का 1400 रुपये प्रति वर्ग मीटर और आबादी वाली भूमि के लिए चार हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर का मुआवजा दिलाने की बात कही थी।
आर्बिट्रेशन के खिलाफ एनएचएआई ने जिला जज के यहां अपील की, लेकिन निर्धारित समय में अपील न कर पाने के चलते अपील खारिज हो गई। किसान इकबाल व अन्य ने बताया कि उन्हें जिला कोर्ट से न्याय मिला है। यदि प्राधिकरण आगे भी जाएगा तो वह लड़ाई को लड़ेंगे।
मुआवजे की आस में धरने पर बैठे किसान
क्षेत्र के गांव मैना मौजपुर में फ्रेट कॉरिडोर प्रकरण के तहत 245 दिनों से किसान लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे है। अभी तक मुआवजा दिए जाने पर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ है। बेबस किसान केंद्र सरकार से जल्द मुआवजा दिए जाने की गुहार लगा रहे है।
मैना मौजपुर गांव में फ्रेट कॉरिडोर प्रकरण के तहत 245 दिनों से लगातार किसान धरने पर बैठे है। तेज बारिश, आंधी और अब लू में आदि तमाम परेशानियों से जूझते हुए किसान अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं।
किसान नेता सुग्रीव सोलंकी ने बताया कि केंद्र-प्रदेश सरकार में बैठे नेताओं से किसान काफी समय से मुआवजे की गुहार लगा रहे है। लेकिन किसी ने भी उनकी कोई फरियाद नहीं सुनी। बेबस किसान अभी केंद्र सरकार से एक बार फिर से मुआवजे की मांग करेंगे।