मतदान के लिए लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से तीन फरवरी को जिले में मशाल रिले दौड़ का आयोजन किया जाएगा। इसमें अफसर, शिक्षक और विद्यार्थी शामिल होंगे। यह दौड़ सिकंदराबाद क्षेत्र के कोट के पुल से नरौरा बैराज तक आयोजित होगा। इसके बाद बैराज से अफसर और शिक्षक डीजे/मशाल लेकर अनूपशहर के रास्ते कालाआम पर पहुंचेंगे।
बीएसए धर्मेंद्र सक्सेना ने बताया कि मशाल रिले दौड़ की शुरुआत तीन फरवरी की सुबह छह बजे कोट के पुल से होगी। इसमें एक प्रतिभागी 500 मीटर तक मशाल लेकर दौड़ेगा और फिर दूसरे प्रतिभागी को सौंपेगा। इसमें बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर, शिक्षक और विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी भागीदारी करेंगे।
सिकंदराबाद क्षेत्र में मशाल की कमान एनपीआरसी और शिक्षक संभालेंगे और दरियापुर में दौड़ का स्टे होगा। यहां पर चाय-पानी की व्यवस्था होगी और इसके बाद बुलंदशहर क्षेत्र के अफसर और शिक्षकों को मशाल सौंप दी जाएगी। इसके बाद मशाल का स्टे शिकारपुर क्षेत्र के गांव चिट्टा के पास स्टे होगा और यहां पर शिकारपुर क्षेत्र के अफसर और शिक्षक मशाल संभालेंगे।
यहां से मशाल औरंगाबाद जगदीशपुर पहुंचेगी और अहमदगढ़ में मशाल दानपुर के खंड शिक्षा अधिकारी को सौंपी जाएगी। इसके बाद डिबाई होते हुए मशाल रिले दौड़ का समापन नरौरा में गंगा बैराज पर होगा। गंगा बैराज से दोपहर बाद डिबाई में मशाल रिले दौड़ को डीजे/मशाल में तबदील कर दिया जाएगा।
इसमें शामिल अफसर और शिक्षक डीजे/मशाल को लेकर अनूपशहर के रास्ते जहांगीराबाद होते हुए कालाआम पर पहुंचेगे। जहां पर इसका समापन होगा। उन्होंने बताया कि इस रिले दौड़ में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी भी शामिल होंगे और सभी की ड्यूटी निर्धारित कर दी है।
बीएसए ने यह भी बताया कि पहले मशाल रिले दौड़ दो फरवरी को निकालने का निर्णय लिया था। मगर, पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की रैली होने के कारण तीन फरवरी को निकालने का निर्णय लिया है।
लोकतंत्र के सशक्तिकरण को मतदान जरूरी
मतदाताओं को जागरूक करने के लिए आजाद स्कॉलर्स एकेडमी के छात्रों ने स्याना नगर में जागरुकता रैली निकाली। रैली का शुभारंभ एकेडमी के चेयरमैन असमर आजाद ने किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के सशक्तिकरण के लिए एक-एक मत का मूल्य होता है।
जिससे देश का निर्माण व विकास भी होता है। रैली नगर के सभी प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। प्रधानाचार्या शशि शर्मा के साथ-साथ अन्य शिक्षक एवं शिक्षिकाओं का भी विशेष योगदान रहा।