बुलंदशहर। गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु की मौत के मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय ने तलब किया है। न्यायालय ने लगातार 12 तारीखों तक आख्या प्रस्तुत न करने पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे न्यायालय की अवमानना माना है। सीजेएम ने सीएमओ को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 29 अक्तूबर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है।
खुर्जा देहात के युसूफपुर मलगोसा निवासी अनीश ने बीएनएसएस की धारा 175(3) के तहत सीजेएम न्यायालय में एक प्रार्थना पत्र दिया था। अनीश ने बताया कि वह अपनी गर्भवती पत्नी अफरोजी को प्रसव के लिए पीएचसी अस्पताल मुनी लेकर गए थे। उनके साथ आशा कार्यकर्ता भी थी। आशा कार्यकर्ता महिला को खुर्जा नगर स्थित एक निजी अस्पताल ले गई। यहां उनसे ऑपरेशन से डिलीवरी कराने की बात कहकर 12 हजार रुपये जमा करा लिए गए।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि अस्पताल में गर्भवती महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई लेकिन स्टाफ उन्हें यही कहता रहा कि ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक कुछ देर में आने वाले हैं। अनीश ने बताया कि 12 मार्च 2025 की शाम को महिला और गर्भस्थ शिशु दोनों की मृत्यु हो गई। इसके बाद अस्पताल का सभी स्टाफ वहां से भाग गए। घटना के बाद पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम कराया। पीड़ित का आरोप है कि अभी तक उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है।
मामले में सीजेएम न्यायालय ने 29 मई 2025 को मुख्य चिकित्सा अधिकारी को आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। न्यायालय के लगातार निर्देश दिए जाने के बावजूद 12 तारीखों तक सीएमओ कार्यालय ने कोर्ट में कोई रिपोर्ट नहीं भेजी। इस लापरवाही पर नाराजगी व्यक्त करते हुए सीजेएम ने टिप्पणी की कि सीएमओ का यह कृत्य घोर आपत्तिजनक है और न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आता है। सीजेएम न्यायालय ने अब सीएमओ को 29 अक्तूबर को न्यायालय के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अपना स्पष्टीकरण पेश करने और आख्या देने का आदेश दिया है।