पहासू। कोहरे के कारण बुधवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते बच गया। रजवाहे पर पुलिया की दीवार न होने के कारण कार उसके अंदर पलट गई। वहां मौजूद राहगीर और ग्रामीणों ने कार का शीशा तोड़कर उसमें बैठे परिवार के पांच लोगों को बाहर निकाला। सभी मामूली रूप से घायल हुए हैं। गनीमत रही कि कार पलटने के दौरान रजवाहे में पानी कम था।
पिछले दिनों नोएडा में कोहरे के कारण एक इंजीनियर की कार नाले में पलटने से मौत हो गई थी। बुधवार को घना कोहरा होने के कारण ऐसा ही बड़ा हादसा यहां भी होते-होते बच गया। हाथरस के सासनी निवासी निवासी सत्यदेव ने बताया कि मंगलवार को वह नरौरा में परिवार के साथ शादी समारोह में शामिल होने गए थे। इसके बाद वहां से बुधवार सुबह दिल्ली में रहने वाले रिश्तेदार के यहां जा रहे थे।
उन्होंने बताया कि सुबह के समय कोहरा अधिक होने की वजह से दृश्यता बहुत कम थी, जिसके चलते वह कार काफी सावधानी से चला रहे थे। जब वह पहासू के कसूमी गांव की तरफ पहुंचे, तो पुलिया के पास तीव्र मोड़ होने की वजह से उनको रजवाहा नहीं दिखाई दिया, जिसके चलते उनकी कार रजवाहे में पलट गई।
सत्यदेव ने बताया कि रजवाहे में कार उल्टी हो गई थी, जिसके चलते निकलना मुश्किल हो रहा था। कार में सत्यदेव के अलावा उनकी पत्नी और तीन बच्चे भी थे। पानी अंदर आने के डर से उन्होंने कार के दरवाजे नहीं खोले। किसी तरह अकेला बाहर निकलने का प्रयास करने लगे। वहीं, कार को डूबता देख राहगीर वहां आ गए और उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों को भी मदद के लिए बुलाया।
कार की खिड़की नहीं खुल रही थीं, तो ग्रामीणों ने शीशा तोड़कर परिवार को बाहर निकाला। पानी में डूबने के कारण सभी लोग डर गए थे और घबरा रहे थे। सत्यदेव और उनके परिवार को ग्रामीणों ने पहासू सीएचसी पहुंचाया। हालांकि किसी को गंभीर चोट नहीं थी। इसके बाद ग्रामीणों ने ट्रैक्टर पर रस्सी बांधकर कार को रजवाहे से बाहर निकाला।
राहगीर व सोही गांव निवासी विपिन शर्मा ने बताया कि पुलिया की दीवार नहीं होने के कारण यहां आए दिन हादसे होते हैं। लोक निर्माण विभाग को रेलिंग व दीवार लगवाने, दोनों ओर संकेतक लिखे जाने के लिए पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। बीते माह इसी तरह नोएडा में एक हादसा हो गया था, जिसमें एक इंजीनियर की कार समेत नाले में डूबने से मौत हो गई थी। इसी तरह यहां पर भी हादसा हो सकता है।
कम ही उम्मीद थी कि कोई हमें बचाने आएगा
सत्यदेव ने नम आंखों से बताया कि सीधे-सीधे कार अचानक झटका लेकर रजवाहे में गिर गई। इसके बाद कुछ समझ नहीं आया और कुछ मिनट तक आंखें बंद हो गईं। आंखें खुली तो कार उल्टी थी और रजवाहे में पड़ी थी। कार खोलने में डर था कहीं पानी अंदर नहीं आ जाए। ऐसे में किसी तरह वहां पर बचाने वाले की आस लगा रहे थे। सुबह का वक्त था तो मार्ग पर राहगीर भी कम थे। ऐसे में उम्मीद नहीं थी कि कोई आ जाएगा।
हादसे की जानकारी मिली थी। स्थानीय लोगों ने समय रहते हुए सभी को बाहर निकाल लिया। हादसे में किसी को गंभीर चोट नहीं थी। प्राथमिक उपचार के बाद परिवार अपने घर लौट गया था। - शशांक श्रीवास्तव, सीओ शिकारपुर
जहांगीरपुर में इस तरह सात लोगों की हो गई थी मौत
जहांगीरपुर की कपना नहर में दो साल पहले इसी तरह कार सवार सात लोगों की डूबने से मौत हो गई थी। देर रात को झाझर से बारात के दस लोग ईको कार में बैठकर अलीगढ़ जा रहे थे। कपना नहर में तीव्र मोड़ के कारण कार नहर में डूब गई थी। इसमें एक बच्ची समेत सात लोगों की मौत हो गई थी। मृतक की तलाश के दौरान ही एनडीआरएफ को दो अन्य शव भी मिले थे।