मरीजों की तपन पर अफसरों की लापरवाही भारी है। बारिश ने लाखों रुपये की दवाएं सड़ा दीं और अफसरों को अभी तक इसकी भनक भी नहीं है। मामला तूल पकड़ता देख अब अफसर पल्ला झाड़ रहे हैं। वहीं, बारिश में बाहर रखे स्वास्थ्य उपकरणों में जंग लगने से यह बेकार हो रहे हैं।
जिला अस्पताल के मुख्य दवा स्टोर में लाखों रुपये की दवाएं बारिश की भेंट चढ़ गईं। जिला अस्पताल की मुख्य फार्मेसी के बाहर रखी इन दवाआें को बारिश से बचाने के लिए किसी अफसर या कर्मचारी ने उठाने की जहमत तक नहीं उठाई।
बारिश से दवाएं भीगने के बाद अफसरों को होश आया। मामला तूल पकड़ते ही दवाओं को बाहर से हटा दिया गया। अब अफसर दलील दे रहे हैं कि यह दवाएं जिले के विभिन्न अस्पतालों पर जानी थीं, जिसके कारण बाहर रखी गई। यह हाल तब है, जब जिलेभर में बुखार का प्रकोप है।
अस्पतालों में दवाओं की भारी कमी चल रही है। मरीजों तक दवाएं नहीं पहुंच पा रही हैं। सरकारी अस्पताल में जाने वाले मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। इसके अलावा मुख्य फार्मेसी के बाहर लाखों रुपये के रखे उपकरण बारिश में भीगने के कारण जंग खा रहे हैं।
जंग लगने से यह उपकरण खराब हो रहे हैं। कमीशन के चक्कर में यह उपकरण मंगा तो लिए गए, लेकिन अब इन्हें इनकी जगह तक नहीं पहुंचाया जा रहा है।
मामले की जानकारी नहीं है। चीफ फार्मासिस्ट से पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की जाएगी। लापरवाही बरतने पर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. दीपक ओहरी, सीएमओ
चीफ फार्मासिस्ट डॉ. जगदीश पाल तेवतिया का कहना है कि यह दवाएं सीएचसी और पीएचसी पर जानी थीं। मै बाहर था, इसलिए देख नहीं पाया। कर्मचारियों को फटकार लगाई गई है।