- देवनागरी महाविद्यालय के शिक्षक संघ ने किया विरोध
संवाद न्यूज एजेंसी
गुलावठी। उच्च शिक्षा निदेशक, प्रयागराज द्वारा अनुदानित महाविद्यालयों में बायोमीट्रिक उपस्थिति को अनिवार्य रूप से लागू किए जाने के विरोध में देवनागरी महाविद्यालय शिक्षक संघ, गुलावठी ने काली पट्टी बांध कर विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. महेंद्र कुमार ने कहा कि संबंधित पत्र सरकार की शिक्षक एवं छात्र विरोधी मानसिकता का परिणाम है। शिक्षकों के दायित्व को समय सीमा में बांधना उनके कार्यों में हस्तक्षेप तथा शिक्षकों की गरिमा को गिराने वाला कृत्य समझा जाना चाहिए।
शिक्षक संघ के सचिव डॉ. पुष्पेंद्र कुमार मिश्र ने कहा की शिक्षकों का एकमात्र कार्य महाविद्यालय उपस्थित रहकर छात्रों के सामने लेक्चर देना भर नहीं है। शिक्षण के साथ शोध कार्य तथा समाज में जागरूकता फैलाने जैसे अन्य कार्य भी उन्हें करते पड़ते हैं। इसके लिए उन्हें पर्याप्त समय और सुविधाएं चाहिए होती हैं। महाविद्यालयों में जहां पर मूलभूत सुविधाएं जैसे कंप्यूटर, इंटरनेट तथा टॉयलेट आदि की व्यवस्थाएं नहीं है, वहां पर शिक्षकों को बायोमीट्रिक उपस्थिति के नाम पर जबरदस्ती बैठाए रखना उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने जैसा है। महाविद्यालय में एक समय सीमा तक बैठे रहने की बाध्यता न केवल व्यक्तिगत स्तर पर स्वतंत्र सोच एवं नवाचार को प्रभावित करेगी, बल्कि संस्थागत स्तर पर भी कुल उत्पादकता में कमी लाएगी।
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के संयुक्त सचिव पीयूष त्रिपाठी ने कहा की महाविद्यालयों में छात्रों की बायोमीट्रिक उपस्थिति को अनिवार्य करना नई शिक्षा नीति 2020 के मूलभूत उद्देश्यों के भी विपरीत है। जहां पर नई शिक्षा नीति 2020 का एक लक्ष्य सन 2030 तक उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात 50 प्रतिशत तक बढ़ाना है, वहीं पर बायोमीट्रिक उपस्थिति की अनिवार्यता महाविद्यालय में छात्रों को संस्थागत प्रवेश लेने के स्थान पर व्यक्तिगत अथवा पत्राचार से प्रवेश लेने की ओर विवश करेगी। इससे शैक्षणिक गुणवत्ता पर नकारात्मक रूप से असर पड़ेगा।
इस अवसर पर उपाध्यक्ष डॉ. विनीता, कोषाध्यक्ष डॉ. अवधेश कुमार सिंह, अतुल तोमर, हरिदत्त शर्मा, विनय कुमार सिंह, डॉ.संदीप कुमार सिंह, नरेश कुमार, भवनीत सिंह बत्रा, कृष्ण कुमार, नवीन तोमर, श्याम प्रकाश, शशि कपूर और डॉ. हरीश कसाना मौजूद रहे।